
✅ बख्तावर अदब : रियाद
गुजिश्ता साल 2025 में सऊदी अरब ने ख़जूरों की बरामदात (एक्सपोर्ट) में रिकार्ड इज़ाफ़ा किया है, जिसकी मालियत 1.938 अरब रियाल (517 मिलियन डालर) तक जा पहूंची जो 2024 के मुक़ाबले में 14.3 फ़ीसद ज़्यादा और 2021 के बाद से 59.5 फ़ीसद नुमायां इज़ाफ़ा है।
सऊदी ख़जूरों की सबसे ज्यादा डिमांड जर्मनी में है। इसके अलावा दीगर आलमी मार्केट में इसकी खासी मक़बूलियत है।
सऊदी ख़जूरों की सबसे ज्यादा डिमांड जर्मनी में है। इसके अलावा दीगर आलमी मार्केट में इसकी खासी मक़बूलियत है।
जीअकादा, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
उम्मूल मोमिनिन हज़रत आयशा रदि अल्लाहु ताअला अन्हू से रिवायत है कि नबी करीम ﷺ मकान में तशरीफ़ लाए, देखा कि रोटी का टुकड़ा पड़ा है, उसे उठाया, पोछा और खा लिया। और फरमाया, आयशा, अच्छी चीज़ का एहतराम करो। ये चीज़ यानी रोटी जब किसी कौम से भागती है तो लौट कर नहीं आती।- इब्न मजाह
सऊदी वज़ीर माहौलियात, पानी और ज़राअत अबदुर्रहमान अलफ़ज़ली के मुताबिक क़ियादत की सपोर्ट और मूसिर पब्लिक, प्राईवेट तआवुन ही ये कामयाबी हासिल की जा सकी है।
गौरतलब है कि सऊदी अरब से 125 से ज़्यादा मुल्कों को मुनफ़रद किस्म की खजुरें एक्सपोर्ट की जाती है। 2025 में खजूर के 37 मिलियन से ज़्यादा दरख़्त हैं जिनसे 1.9 मिलियन टन से ज़्यादा खजूरें पैदा होती हैं।
गौरतलब है कि सऊदी अरब से 125 से ज़्यादा मुल्कों को मुनफ़रद किस्म की खजुरें एक्सपोर्ट की जाती है। 2025 में खजूर के 37 मिलियन से ज़्यादा दरख़्त हैं जिनसे 1.9 मिलियन टन से ज़्यादा खजूरें पैदा होती हैं।

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