मक्का-मदीना का रूहपर्वर मंजर, हर पंजगाना के बाद आदा होती है नमाज-ए-जनाज़ा

जिल हज्ज, 1447 हिजरी 

   फरमाने रसूल     

लोगों को अपने शर से महफूज़ कर दो, उन्हें तकलीफ ना पहुंचाओ के ये भी एक सदका है, जिसे आप खुद अपने आप पर करोगे।

- सहीह बुखारी 

 

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✅ मक्का मुकर्रमा से ज़ाकिर घुरसेना
 

    हर साल लाखों की तादाद में दुनियाभर से मुसलमान लब्बैक कहते हुए मक्का-मदीना की ओर दौड़े चले आते हैं। इनमें से कई ऐसे खुशनसीब भी होते हैं, जो अरकान-ए-हज के दौरान रजा-ए-इलाही से जा मिलते हैं। कोई नमाज़ की हालत में होता है तो कोई एहराम बांधे होता है। कोई तिलावत कर रहा होता है तो कोई काअबे शरीफ को निहार रहा होता है, और उसी हालत में दुनिया-ए-फानी को अलविदा कह जाता है। वे मैं हाजिर हूं कहते हुए आते हैं और रब ताअला के हुजूर हाजिर हो जाते हैं। 


   जन्नतुल बकी की जियारत करने के लिए क्लिक करें  


 https://youtu.be/o9Zd2q9TMJA

https://youtu.be/WKbly5lQ6y0

https://youtu.be/LyV-UeP6Hi0 


इन खुशनसीबों की नमाज-ए-जनाज़ा मस्जिद अल हरम और मस्जिद-ए-नबवी 000 में अदा होती है और अबदी नींद के लिए उन्हें जगह मिलती है जन्नतुल बकी में। 

    मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा में हर पंजगाना के बाद नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की जाती है। रसूल अल्लाह 000 का फरमान-ए-आलीशान है, जो हज के लिए निकले और रास्ते में इंतेकाल कर जाए, उसे ता तयामत हज का सवाब मिलता रहेगा। वे ब रोजे महशर लब्बैक कहते हुए उठाए जाएंगे। 


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