जिल हज्ज, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
लोगों को अपने शर से महफूज़ कर दो, उन्हें तकलीफ ना पहुंचाओ के ये भी एक सदका है, जिसे आप खुद अपने आप पर करोगे।
- सहीह बुखारी
हर साल लाखों की तादाद में दुनियाभर से मुसलमान लब्बैक कहते हुए मक्का-मदीना की ओर दौड़े चले आते हैं। इनमें से कई ऐसे खुशनसीब भी होते हैं, जो अरकान-ए-हज के दौरान रजा-ए-इलाही से जा मिलते हैं। कोई नमाज़ की हालत में होता है तो कोई एहराम बांधे होता है। कोई तिलावत कर रहा होता है तो कोई काअबे शरीफ को निहार रहा होता है, और उसी हालत में दुनिया-ए-फानी को अलविदा कह जाता है। वे मैं हाजिर हूं कहते हुए आते हैं और रब ताअला के हुजूर हाजिर हो जाते हैं।
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मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा में हर पंजगाना के बाद नमाज़-ए-जनाज़ा अदा की जाती है। रसूल अल्लाह 000 का फरमान-ए-आलीशान है, जो हज के लिए निकले और रास्ते में इंतेकाल कर जाए, उसे ता तयामत हज का सवाब मिलता रहेगा। वे ब रोजे महशर लब्बैक कहते हुए उठाए जाएंगे।

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