साल 2026 की सबसे बुजुर्ग हाजी
दलिया बेचकर कई साल तक गुल्लक में जमा करती रहीं रकम
जिल हज्ज, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
लोगों को अपने शर से महफूज़ कर दो, उन्हें तकलीफ ना पहुंचाओ के ये भी एक सदका है, जिसे आप खुद अपने आप पर करोगे।
- सहीह बुखारी
बख्तावर अदब : इंडोनेशिया के सूबा मशरिक़ी जावा के शहर केदरी की एक बुजुर्ग खातून मुबाह मर्सिया को आखिरकार 104 साल की उम्र में इस साल हज का सफर नसीब हुआ। हज के लिए वे कई सालों तक दलिया बेचकर रकम जमा रही थीं।
104 साला मुअम्मर इंडोनेशियन ख़ातून रवां बरस हज करने वाले दो लाख 21 हज़ार इंडोनेशियन आज़मीन-ए-हज में शामिल थीं। हालांकि सफर-ए-हज का ख्वाब पूरा होना उनके लिए इंतेहाई मुश्किल था। सालों तक दलिया बेचकर पाई-पाई जोड़ना आसान नहीं था लेकिन उनका जज्बा सारी दुश्वारियों पर भारी पड़ गया और आखिरकार उनका ख्वाब पूरा हो गया।
मुबाह मर्सिया ने फ़रीज़-ए-हज का ख़ाब पूरा करने कई बरस बचत की। हज के लिए पहली बार उन्होंने साल 2021 में रजिस्ट्रेशन करवाया था।
हज मीडिया सेंटर में सहाफियों से बात करते हुए उन्होंने बताया कि वे कई सालों से दलिया फ़रोख़त करती हैं, जिससे थोड़ी बहुत बचत हो जाती थी। अपनी बचत को वे एक डिब्बे में जमा करती जाती थी। किसी दिन कोई कमी हो जाती तो उनका बेटा उसे पूरा कर देता था।
उन्होंने कहा कि थोड़ी-थोड़ी बचत करते हुए आख़िरकार इतनी रक़म जमा हो गई कि हज के लिए रजिस्ट्रेशन करवाया जा सके। हालांकि अपनी ख्वाहिश का उन्होंने किसी से जिक्र नहीं किया था। ये तक नहीं बताया था कि वे हज के लिए बचत कर रही हैं। जब अच्छी-खासी रकम जमा हुई तब जाकर उन्होंने लोगों को बताया कि वे हज पर जाना चाहती हैं और इसके लिए वे लंबे समय से बचत कर रही हैं।
मुबाह मर्सिया की पैदाईश एक जुलाई 1921 को हुई थीं। अब उनकी उम्र 104 साल है। उम्र के इस पड़ाव पर वे छड़ी के सहारे आहिस्ता-आहिस्ता चलती है। हज के दौरान ज़्यादातर अरकान उन्होंने व्हील चेयर पर पूरे किए।
वे 22 मई की सुबह अपनी 67 साला बेटी मोईदा के हमराह मक्का पहुंचीं।
- उर्दू न्यूज़ से ब-शुक्रिया

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