आलिमो ने की आवाज बुलंद, मुहर्रम और दीगर सभी जुलूस में बंद हो डीजे का शोर-शराबा

 जिल हज्ज, 1447 हिजरी 

   फरमाने रसूल      

कयामत के दीन मोमिन के मीज़ान में अखलाक-ए-हसना (अच्छे अखलाक) से भारी कोई चीज़ नहीं होगी, और अल्लाह ताअला बेहया और बदज़बान से नफरत करता है।

- जमाह तिर्मिज़ी 


अशरफी मस्जिद, रूआबांधा बस्ती में हुई बैठक, दुर्ग-भिलाई की तमाम मस्जिदों के इमाम और आलिमों ने की शिरकत


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0 दम तोड़ रही उर्दू को सरे नौ जिंदा करने और दीनी व मजहबी मुआमले को लेकर अपनी सोच व फिक्र का जवाब तलाशने के लिए हमसे जुड़े …… हम हैं ‘ बख्तावर अदब’ …. बख्तावर अदब : भिलाई

✅ बख्तावर अदब : भिलाई-दुर्ग

    भिलाई-दुर्ग व आसपास की तमाम मस्जिदों के इमामों और आलिमों की बैठक में अहम बैठक में यौमे आशूरा समेत दीगर सभी मज़हबी जुलूस के दौरान डीजे, शोर-शराबा, बेपर्दगी के अलावा दीगर सभी गलत रस्मों को रोकने के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर मुजाकरात हुआ। 

    इतवार, 21 जून को अशरफी मस्जिद, रूआबांधा बस्ती में अशरफी मस्जिद व मदरसा के सदर सैयद अली के को-आर्डिनेशन में मुनाकिद बैठक मौजूद आलिमों ने फिक्र जाहिर करते हुए कहा कि डीजे और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम न सिर्फ शोर की आलूदगी फैलाते हैं, बल्कि लोगों की सेहत, ताअलीम, समाजी इंतेजाम और अवामी अमन के लिए भी संजीदा खतरा बनते हैं।

    बैठक में शामिल उलेमा, हुफ्फाज़ और इमामों ने इस बात पर जोर दिया कि मुहर्रम जैसे पाक महीने में अमन, संजीदगी और दीन की सही समझ को बढ़ावा दिया जाए। सभी ने मांग की कि शादी, मजहबी जुलूस और दीगर तमाम समाजी प्रोग्राम में डीजे और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को पूरी तरह बंद किया जाए, ताकि समाज में अमन और भाईचारा कायम रहे। बैठक के आखिर में आलिमों ने हुक्काम से डीजे और गैर जरूरी शोर-शराबे के खिलाफ मूसर काररवाई की मांग की।


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करबला की याद ताज़ा करने का एक जरिया है ताजिया

बैठक में आलिमों ने यह भी साफ किया कि ताजिया यानी हुबहू रौज़ा-ए-हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की नकल बनाकर बरकत की नीयत से रखना हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु और वाक़िया-ए-कर्बला की याद ताज़ा करने का एक जरिया है। लेकिन ताजिया बनाकर उसे मिट्टी में दबा देना या पानी में बहा देना माल की बर्बादी और बेअदबी है। इसलिए ताजिए के नाम पर होने वाली गलत रस्में, गैर-शरई काम, शोर-शराबा, ढोल-ताशे, खवातीन ओ मर्द का गैरजरूरी मेल, बेपर्दगी और दूसरे गैर मुनासिब अमल किसी भी हाल में मंजूर नहीं किए जा सकते, क्योंकि इससे हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के असल पैगाम पर मनफी असर पड़ता है।


इमाम हुसैन से सच्ची मुहब्बत है खिदमते खल्क

आलिमों ने कहा कि अगर हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु से सच्ची मोहब्बत का इज़हार करना है तो इसका सबसे अच्छा तरीका खिदमते खल्क है। उनके नाम पर जरूरतमंदों-मरीजों की मदद की जाए  और गरीब बेटियों के शादियों में मदद की जाए। बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि मुहर्रम के जुलूस अमन, नज्म-ओ-जब्त और आपसी एहतेराम के साथ निकाले जाएं। जुलूस के दौरान या उसके बाद फैलने वाली गंदगी की सफाई का खास इंतजाम किया जाए, जिससे समाज में मुसबत पैगाम जाए कि हज़रत इमाम हुसैन रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के मानने वाले महज दावे नहीं करते, बल्कि खिदमत, तालीम और सफाई में भी मिसाल पेश करते हैं।


    बैठक में मुफ्ती जलालुद्दीन रज़वी-हाउसिंग बोर्ड, मौलाना इकबाल अंजुम अशरफ़ी, सेक्टर 6, मुफ्ती कलीम अशरफ रज़वी, कैंप 2, मुफ्ती जामी क़मर अज़हरी, ज़ोन 3, मुफ्ती सलीम रज़ा, इमाम जामा मस्जिद, दुर्ग, मौलाना अमीर अहमद क़ादरी, फ़रीदिया मस्जिद, मुफ्ती मुहम्मद शाहिद अली मिस्बाही, रुआबांधा, मौलाना शहाबुद्दीन अशरफ़ी, दुर्ग, मुफ्ती माशा अल्लाह, मक्का मस्जिद, फ़रीद नगर, मुफ्ती फैजान रज़ा मिस्बाही, बोरसी, क़ारी सनाउल्लाह रज़वी, रिसाली, क़ारी उमर फारूक अशरफ़ी, रुआबांधा, क़ारी अब्दुल क़य्यूम, खुर्सीपार 3, हाफ़िज़ क़ासिम, रायपुर नाका, दुर्ग, हाफ़िज़ इसराफिल, हुडको मस्जिद, क़ारी इरफ़ान, मदरसा अशरफ़िया, हाफ़िज़ मुहम्मद शमशीर अली अशरफ़ी, रुआबांधा, हाफ़िज़ जमील रज़ा, मरौदा, हाफ़िज़ ज़ीशान रज़ा, मरौदा, हाफ़िज़ ज़ुहूर अशरफ़ी, मरौदा, हाफ़िज़ शहादत अशरफ़ी, मरौदा, हाफ़िज़ ग़ुलाम रज़ा, नूरी मस्जिद, फ़रीद नगर, हाफ़िज़ मज़हर अली, बोरसी, मौलाना मक़सूद, कैंप 1, क़ारी जमील, कैंप 1, हाफ़िज़ मक़सूद रज़ा, सेक्टर 8, हाफ़िज़ शमशीर, केलाबाड़ी, हाफ़िज़ रफ़ीउल्लाह, जामुल, हाफ़िज़ शराफ़त, नूरी मस्जिद, फ़रीद नगर, मौलाना इलियास मिस्बाही, अशरफ़िया, दुर्ग, मौलवी इकरामुद्दीन अशरफ़ी, रुआबांधा, हाफ़िज़ अब्दुल करीम, फ़रीद नगर, मुहम्मद रफ़ीक़, कैंप 2, हाफ़िज़ अकबर, हाफ़िज़ तारिक़, भिलाई, हाफ़िज़ असरार, ज़ोन 1, हाफ़िज़ नसीम, ज़ोन 3, हाफ़िज़ क़ुरबान, रायपुर नाका, हाफ़िज़ नसीम, भिलाई 3, हाफ़िज़ एहसान, अशरफ़िया, दुर्ग, हाफ़िज़ इस्माईल, कुरुद, हाफ़िज़ मुहम्मद आसिफ, कुरुद, हाफ़िज़ नोमान रज़ा और मदरसा ताजुल उलूम रुआबांधा भिलाई के मैनेजर सैयद अफ़ताबुर्रब सहित दीगर हज़रात शामिल थे। 


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