अदबी तंज़ीम आरंभ के जे़रे एहतिमाम '' भिलाई ज़िंदाबाद '' पर मुज़ाकरा
मुक़र्ररीन ने पेश किए अपने ख़्यालात
भिलाई एक ख़ानदान की मानिंद है, उसे तोड़ने वालों को नहीं होने देंगे कामयाब
अस्पताल और टाउन शिप को बचाने के लिए ओए, सैफी की तजावीज़
मुसन्निफ़ की तहनियत, पद्म विभूषण तीजन बाई को पेश की खेराज-ए-अक़ीदत
✅ बख्तावर अदब : भिलाई
तरक़्क़ी-पसंद अवामी फ़िक्र की अदबी तंज़ीम "आरंभ" के जे़रे एहतिमाम मुसन्निफ़-ओ-सहाफ़ी मुहम्मद ज़ाकिर हुसैन की किताब "भलाई ज़िंदाबाद कुछ क़िस्से, कुछ कहानियां" पर एक मुज़ाकरा-ओ-तबादला-ए-ख़्याल का इनइक़ाद भिलाई निवास के इंडियन काफ़ी हाऊस के आडीटोरीयम में किया गया।
तक़रीब का आग़ाज़ संध्या साटकर की सरस्वती वंदना से हुआ, जिसके बाद मेहमान-ए-ख़ुसूसी ने शम्मा रोशन करके प्रोग्राम का इफ़्तिताह किया। इस्तिक़बालीया कलिमात तंज़ीम आरंभ के सदर प्रदीप भट्टाचार्य ने पेश किए, जबकि तंज़ीमी ख़िताब कन्वीनर शौकत इक़बाल ने दिया।
तक़रीब के मेहमान-ए-ख़ुसूसी बीएसपी ऑफीसरज़ एसोसीएशन के सदर और स्टील एग्जीक्यूटिव फेडरेशन आफ़ इंडिया (सैफी) के चेयरमैन नरेंद्र कुमार बंछोर थे। प्रोग्राम से खिताब करते हुए उन्होंने कहा कि मुसन्निफ़ मुहम्मद ज़ाकिर हुसैन ने इस किताब में ना सिर्फ भिलाई की तारीख़ को दिलचस्प अंदाज़ में पेश किया है बल्कि शहर के मुस्तक़बिल के हवाले से भी अपनी गहिरी तशवीश का इज़हार किया है।
उन्होंने भिलाई को दरपेश मौजूदा चैलेंजिज़ का ज़िक्र करते हुए कहा कि ऐसी फ़िज़ा बनाई जा रही है कि किसी ना किसी तरह भिलाई को निजकारी की तरफ़ धकेला जाए। इससे पहले भी 2004 में ऐसी कोशिश की गई थी, लेकिन भिलाई की अवाम ने अपनी यकजहती के ज़रीये उसे नाकाम बना दिया था। उन्होंने यक़ीन दिलाया कि बीएसपी ओए और सैफी की जानिब से निजकारी की हर कोशिश की भरपूर मुख़ालिफ़त की जाएगी।
उन्होंने सेक्टर 9 अस्पताल के हवाले से अवाम की तशवीश को जायज़ क़रार देते हुए बताया कि ओए, सैफी ने इंतिज़ामीया के सामने ये तजवीज़ रखी है कि दिल, गुर्दा और न्यूरो जैसे अहम शोबों के लिए किसी माहिर इदारे के साथ मुआहिदा करके अस्पताल में अलैहदा इमारत क़ायम की जाये, ताकि मुक़ामी लोगों को आला तिब्बी सहूलयात मयस्सर आ सकें।
टाउन शिप के बारे में उन्होंने कहा कि ऊपर से ये दबाव ज़रूर मौजूद है कि सरकारी शोबे के पास मौजूद ज़मीन का माली इस्तिमाल किया जाए और पुराने मकानात गिरा कर ज़मीन निजी कंपनीयों के हवाले कर दी जाए। उन्होंने आगे कहा, ओए, सेफी की तजवीज़ ये है कि एनबीसीसी या हाऊसिंग बोर्ड जैसे किसी सरकारी इदारे को टाउन शिप में इन ख़ाली मुक़ामात पर मन्सूबा तैयार करने का मौक़ा दिया जाये जहां पुराने मकानात पहले ही गिराए जा चुके हैं और अब वहां गै़रक़ानूनी क़बज़े हो रहे हैं। वहां तालपूरी की तर्ज़ पर नई कॉलोनियां आबाद की जाएं ताकि पूरे टाउन शिप को उजाड़ने की नौबत ना आए। उन्होंने कहा कि भिलाई के लोग ख़ुद को एक ख़ानदान समझते हैं और इस ख़ानदान को तोड़ने की हर कोशिश को नाकाम बनाया जाएगा।
मुसन्निफ़ मुहम्मद ज़ाकिर हुसैन ने अपने ख़िताब में कहा कि मौजूदा दौर में सरकारी इदारे मुख़्तलिफ़ किस्म के चैलेंजिज़ से दो-चार हैं। जब पूरा माहौल ही बदल रहा हो तो ऐसे वक़्त में क़ारईन के हवाले ये किताब करते हुए ज़हन में एक सवाल बार-बार उभरता है कि क्या भिलाई अपनी शिनाख्त और वजूद को महफ़ूज़ रख पाएगा।
इस मौक़ा पर बुनियादी मक़ाला पेश करते हुए नौजवान सहाफ़ी और शायर निलेश त्रिपाठी ने कहा कि बहुत से लोग उनकी तरह भिलाई को सिर्फ जानते हैं, लेकिन अगर वाक़ई इस शहर को समझना और इसकी रूह को पहचानना चाहते हैं तो "भलाई ज़िंदाबाद ज़रूर पढ़नी चाहिए।
ख़ुसूसी मेहमान और मारूफ़ तंज़निगार विनोद साव ने अपनी गुफ़्तगु का आग़ाज़ किताब में मुसन्निफ़ की मरहूमा दादी फ़ातिमा बी के नाम मंसूब इन अलफ़ाज़ से किया -"आपने बीएसपी सैक्टर 1 अस्पताल के बावर्चीख़ाने में कोएले की भट्टी के सामने बरसों अपना ख़ून जला कर एक भरपूर ख़ानदान को ठंडी छांव फ़राहम की। इसके बाद उन्होंने मैत्री बाग़, सैक्टर 9 अस्पताल और भिलाई के माज़ी-ओ-हाल का तक़ाबुली जायज़ा पेश किया।
ख़ुसूसी मेहमान, स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय की प्रिंसिपल डाक्टर हंसा शुक्ला ने कहा कि मुसन्निफ़ ने भिलाई की तारीख़ को निहायत दिलचस्प अंदाज़ में पेश किया है और ये किताब हर भिलाई के बाशिंदे को ज़रूर पढ़नी चाहिए।
मुज़ाकरे की सदारत "आरंभ के चीफ़ एडवाइज़र आचार्य डाक्टर महेश चन्द्र शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि आलमी नक़्शे पर भलाई की अपनी एक मुनफ़रद शिनाख्त है। आज ज़रूरत इस बात की है कि भिलाई की सक़ाफ़्त और भिलाई स्टील प्लांट के सरकारी किरदार को महफ़ूज़ रखा जाये। ऐसे नाज़ुक दौर में " भिलाई ज़िंदाबाद जैसी किताब की एहमीयत मज़ीद बढ़ जाती है।
इस मौक़ा पर तंज़ीम "आरंभ" की जानिब से मुसन्निफ़ मुहम्मद ज़ाकिर हुसैन को शाल, नारीयल और यादगारी निशान पेश करके उनकी तहनियत की गई।
तक़रीब के इख़तताम पर भिलाई स्टील प्लांट से रिटायर्ड माअरूफ़ पंडवानी फनकारा, पद्म विभूषण तीजन बाई के इंतिक़ाल पर दो मिनट की ख़ामोशी इख़तियार करते हुए उन्हें ख़राज-ए-अक़ीदत पेश किया गया।
इस मौक़ा पर आलोक कुमार चंदा, दीप्ति श्रीवास्तव, शानो मोहनन, ठाकुर दशरथ सिंह, शेफाली भट्टाचार्य, संध्या साटकर, राकेश गुप्ता "रूसिया", सुशील यादव, डाक्टर विजय कुमार गुप्ता, बृजेश मुल्क, तारकनाथ चौधरी, डाक्टर नौशाद अहमद सिद्दीक़ी "सब्र", हाजी रियाज़ ख़ान गौहर, टीए ख़ान, जावेद हसन, ओम प्रकाश शर्मा, शुभेंदो बागची, हरी प्रकाश गुप्ता "सरल", नागेंद्र साहू, मुहम्मद तारिक़, सोनीया नायडू, शिव मंगल सिंह, शमशीर सेवानी, घनशाम कुमार देवांगन और तंज़ीम "आरंभ के मुतअद्दिद अराकीन मौजूद थे
निज़ामत तंज़ीम की जनरल सेक्रेटरी नूर-उल-सुबाह ख़ान "सबा" ने की, जबकि शुक्रिया की रस्म सीनीयर नायब सदर त्र्यंबक राव साटकर "अम्बर" ने अदा की।
इस तक़रीब की इत्तिला तंज़ीम "आरंभ के तर्जुमान जावेद हसन और मीडीया इंचार्ज डाक्टर नौशाद अहमद सिद्दीक़ी "सब्र"* ने फ़राहम की।
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