सफर उल मुजफ्फर, 1448 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
हज़रत अब्दुल्ला बिन मसूद रदि अल्लाहो ताअला अन्हू कहते हैं कि मैंने नबी करीम ﷺ से दरयाफ्त किया, खुदा के नज़दीक कौन सा काम ज्यादा पसंदीदा है, आप ﷺ ने फरमाया, वक्त पर नमाज़ अदा करना, मैंने पूछा फिर कौन सा काम, आप ﷺ ने फरमाया वालदैन के साथ भलाई करना, मैंने कहा फिर कौन सा काम, आप ﷺ ने फरमाया, अल्लाह के रास्ते में जिहाद करना।
(बुखारी शरीफ)
✅ ज़ाकिर घुरसेना : रायपुर
मदीना मुनव्वरा में वाके मस्जिद गमामा इस्लामी तारीख में खासी अहम और तारीखी मस्जिद है। गमामा अरबी ज़बान में बादल को कहा जाता है। तारीख के मुताबिक एक बार जब मदीने शरीफ में कहत पड़ गया था, हजरत मुहम्मद ﷺ ने इसी मस्जिद में बारिश के लिए नमाज़ अदा कर दुआ की थी। फिर क्या था, नमाज़ होते ही अल्लाह के हुक्म से मदीना मुनव्वरा के आसमान पर घने बादल छा गए थे और देखते ही देखते झमाझम बारिश होने लगी थी। अहले मुसलमां का ईमान है कि बारिश न होने पर सलातुल इस्तिस्का अदा करने पर बारिश जरूर होती है। और देखा भी यही गया है।
बताया जाता है कि मस्जिद ए गमामा में पैगंबर हजरत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ ने ईद की नमाज़ भी अदा कराई थी। ताअमीर के बाद से इस मस्जिद की मुतअद्दिद बार तौसीअ और तजईन कराई गई है। आज यह मस्जिद तारीखी विरसे में एक है। यों मदीना मुनव्वरा और मक्का मुकर्रमा की दीगर तमामी मस्जिदें और जगहों की अपनी अहमियत है, इसकी बड़ी वजह इन तमामी मुकामों ने पैगंबर हजरत मुहम्मद मुस्तफा ﷺ की कदमबोशी की।
बहरहाल मस्जिद-ए-गमामा, मस्जिद-ए-नबवी ﷺ के गेट 6 और 7 के साउथ वेस्ट से कुछ ही फासले पर वाके है। साथ ही गेट नंबर 310 और 316 से भी ये करीब ही है। मस्जिद-ए-नबवी ﷺ के जिस गेट से भी आप निकले पैदल चलते हुए चंद मिनटों में मस्जिद-ए-गमामा पहुंच सकते हैं। मस्जिद-ए-कुबा जाते वक्त ये मस्जिद आपको बिल्कुल सामने नजर आएगी। मस्जिद के आसपास लोग आपको कबूतरों को दाना खिलाते नज़र जा जाएंगे। हुज्जाज-ए-कराम और उमराह जायरीन मस्जिद-ए-नबवी ﷺ से मस्जिद कुबा जाते हुए मस्जिद अल-गमामा भी आसानी से जा सकते हैं।
मस्जिद-ए-गमाम की तामीर सबसे पहले उमर इब्न अब्दुल अजीज ने करवाई थी। इसमें काले बेसाल्ट और सफेद चूने के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है इसलिए इसे पत्थर की मस्जिद भी बोला जाता है। इसमें पांच गुंबद और एक मीनार है।

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