सफर उल मुजफ्फर, 1448 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
जिसने अच्छी तरह वजु किया फिर अपने मुसलमान भाई के अजरो सवाब की नीयत से आयादत की तो उसको साठ साल के पैदल सफर के बराबर जहन्नम से दूर कर दिया गया।
(अबु दाऊद)
आईना-ए-अदब की बैठक में आइंदा प्रोग्रामों का ख़ाका तैयार
✅ बख्तावर अदब : भिलाई
उर्दू ज़बान की तरक़्क़ी के लिए सरगर्म तंजीम आईना-ए-अदब उर्दू-हिंदी संगम तंजीम, भिलाई-दुर्ग की एक अहम बैठक सुपेला कॉफी हाउस में मुनअक़िद हुई। बैठक में गुज़िश्ता हफ़्ते मुनाकिद "एक नशिस्त, काव्य गोष्ठी, एक शाम, मरहूम शायरों के नाम" की कामयाबी और उसके मुख़्तलिफ़ पहलुओं का जायज़ा लिया गया। साथ ही उर्दू ज़बान के फ़रोग़ के लिए आइंदा मुनअक़िद किए जाने वाले प्रोग्रामों पर भी ग़ौर-ओ-खोज किया गया।
अराकीन की तजावीज़ की रौशनी में यह फ़ैसला किया गया कि कॉलेज सतह पर उर्दू के नामवर शायरों और अदीबों पर ख़ुसूसी तक़रीबात मुनअक़िद की जाएँगी। इन तक़रीबात में उनकी शख़्सियत, अदबी ख़िदमात और शायरी से नौजवान नस्ल को रूबरू कराया जाएगा।
इसी तरह मक़ामी सतह के मरहूम शायरों की याद में भी यादगारी प्रोग्राम मुनाकिद किए जाएँगे। बैठक में यह भी महसूस किया गया कि इलाक़े के कई बुज़ुर्ग शायर आज गुमनामी और नज़रअंदाज़ी की ज़िंदगी गुज़ार रहे हैं, जबकि उन्होंने अपनी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा उर्दू अदब और ज़बान की ख़िदमत में वक़्फ़ कर दिया है। तंजीम आईना-ए-अदब ऐसे बुज़ुर्ग शायरों तक पहुँचेगी, उनकी तक़रीम करेगी और उनकी अदबी व तख़्लीक़ी ख़िदमात को नई नस्ल के सामने पेश करेगी।
बैठक में हाजी रियाज़ ख़ान गौहर, शौकत इक़बाल, जावेद हसन, इस्माइल ख़ान, मोहम्मद अबू तारिक़, शमशीर सिवानी, मुहम्मद ज़ाकिर हुसैन, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीक़ी समेत दीगर अराकीन मौजूद थे।
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