सफर उल मुजफ्फर, 1448 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
आप ﷺ ने बर्तन में सांस लेने और फूकने से माना फ़रमाया, एक शख्स ने अर्ज़ किया की बर्तन में कूड़ा दिखाई देता है, फरमाया, उसे गिरा दो, उसने अर्ज़ किया, मैं एक सांस में सैरयाब नहीँ होता हूं, आप ﷺ ने इरशाद फरमाया, बर्तन को मुंह से जुदा कर के सांस लो।
(तिर्मीज़ी, अबु दाऊद)
✅ मुहम्मद शमीम : रायपुर
मिसाली दोस्ती और जश्न-ए-मुहब्बत के पुरमसर्रत मौक़ा पर बाहमी उखुवत, यकजहती, भाईचारे और मुहब्बत के फ़रोग़ के लिए विमतरा आडीटोरीयम में एक शानदार और ख़ुशगवार माहौल में मुस्लिम इंटेलेक्चुअल फोरम और सर्व आस्था मंच के जे़रे एहतिमाम मिसाली दोस्ती एज़ाज़ तक़रीब का इनइक़ाद किया गया।
इस मौक़ा पर दस दोस्तों पर मुश्तमिल एक ग्रुप, जिसमें हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और मुख़्तलिफ़ ज़ातों और मज़ाहिब से ताल्लुक़ रखने वाले अफ़राद शामिल थे, ने भरपूर जोश-ओ-खरोश के साथ शिरकत की और बाहमी भाईचारे और क़ौमी यकजहती की बेहतरीन मिसाल पेश की। तमाम दोस्तों ने एक-दूसरे से गले मिलकर अपनी पुरानी यादें ताज़ा कीं और ख़ुशगवार लमहात एक-दूसरे के साथ शेयर किए।
प्रोग्राम सुबह 10 बजे शुरू हुआ और दोपहर 2 बजे इख़तताम पज़ीर हुआ। तक़रीब में आठ स्कूलों के तलबा-ओ-तालिबात, जिनमें इंडियन पब्लिक स्कूल, होली क्रास (बैरन बाज़ार), मदर मेरी, थेलीसीम अकेडमी, एपीजे अब्दुल कलाम अकेडमी, माता सुंदरी, नूरानी और इक़रा स्कूल शामिल हैं, ने ड्राइंग और स्लोगन मुक़ाबलों में हिस्सा लिया। तमाम शरीक तलबा को इनामात से नवाज़ा गया।
स्टेज की निज़ामत सय्यद अक़ील ने अपनी दिलकश और मोस्सर अंदाज़-ए-गुफ़्तगु से अंजाम दी, जिसे हाज़िरीन और मेहमानों ने बेहद सराहा।
मुस्लिम इंटेलेक्चुअल फोरम के सदर शकील अहमद, प्रोग्राम कन्वीनर नज़र हुसैनी, सेक्रेटरी आबिद ख़ान जबकि तक़रीब की सदारत जनाब सय्यद फ़ैसल रिज़वी साहिब और सर्व आस्था मंच ने की।
तक़रीब के मेहमान-ए-ख़ुसूसी और मुक़र्ररीन में मारूफ़ सीनीयर सहाफ़ी गिरीश पंकज, स्वामी बुर्ज नाथ आनंद (विवेकानंद आश्रम), बिशप विक्टर हेनरी (बैरन बाज़ार चर्च), हसन अली (साबिक़ सदर, छत्तीसगढ़ उर्दू अकैडमी), नंद लाल (तर्जुमान, शदानी दरबार और डीआर महापात्रा शामिल थे। तमाम मुक़र्ररीन ने बाहमी मुहब्बत, क़ौमी यकजहती, समाजी हम-आहंगी और दोस्ती की एहमीयत पर अपने ख़्यालात का इज़हार किया।
ख़ुसूसी मेहमानों के तौर पर ओमशंकर व्यास्, मज़हर ख़ान, आसिफ़ इक़बाल और दीगर सीनीयर सहाफ़ीयों ने भी तक़रीब में शिरकत की।
इस कामयाब प्रोग्राम को पाया-ए-तकमील तक पहुंचाने में नूर मुहम्मद क़ुरैशी, बशीर ख़ान, ज़फ़र, अमजद, हाशिम साहिब, मनमोहन सैलानी, सेबस्टियन साहिब, प्रेम शंकर गोंटिया, रफ़ीक़ ख़ान समेत मुस्लिम इंटेलेक्चुअल फोरम और सर्व आस्था मंच के तमाम ओहदेदारान और अराकीन ने अहम किरदार अदा किया।

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