जिल हज्ज, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
जिस बंदे के कदम अल्लाह की राह में गुबार आलूद हो गए उन्हें जहन्नम की आग छुए, ये नामुमकिन है।
-सहीह बुखारी
जिल हज्ज, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
जिस बंदे के कदम अल्लाह की राह में गुबार आलूद हो गए उन्हें जहन्नम की आग छुए, ये नामुमकिन है।
-सहीह बुखारी
छत्तीसगढ़ हुकूमत के स्कूल एजूकेशन डिपार्टमेंट की जानिब से सरकारी स्कूलों की रोजमर्रा की सरगर्मियों में मज़हबी मंत्रों की तिलावत और दुआओं को जरूरी करार दिए जाने से मुताल्लिक हुक्म की जगह-जगह खिलाफत देखने को मिल रही है। गुजिश्ता रोज मुस्लिम विकास मंच के ओहदेरदारों व अराकीन ने जारी हुक्म के खिलाफ मुजाहिरा कर मौन रैली निकालकर राज्यपाल के नाम कलेक्टर को मेमोरेंडम सौंपते हुए जारी आदेश को फौरन वापस लेने की मांग की।
मुस्लिम विकास मंच की कयादत में एहतेजाजी मुजाहिरे की शुरुआत लाल बंगला (गौरेला) से हुई। मुजाहिरे में शामिल लोगों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर हुकूमत के हुक्म के तंई अपना एहतेजाज दर्ज कराया जिसके बाद मंच के अराकीन लाल बंगला से कलेक्टर आफिस तक मौन रैली की शक्ल में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने आईन के सेक्यूलर इक्तेदार को बनाए रखने की मांग की। कलेक्टर आफिस पहुंचकर मंच के नुमाइंदों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा ।
मुस्लिम विकास मंच के सदर असद सिद्दीकी ने कहा कि सरकारी स्कूल सभी वर्गों, कम्यूनिटी और मजाहिब के तुलबा के लिए एक सी ताअलीम का मर्कज होती है। ऐसे में किसी खास मजहबी मंत्र को स्कूलों की रोजमर्रा की सरगर्मियों में जरूरी करार देना आईन की सेक्यूलर रूह के मुताबिक नहीं है। उन्होंने कहा, ताअलीम का मकसद तुलबा को इल्म, अखलाकियत और समाजी इकदार से जोड़ना है न कि किसी खास मजहबी रिवायत को फरोग देना।
मेमोरेंडम में कहा कि 12 जून, 2026 को जारी हुक्म से मुख्तलिफ मजाहिब व कम्यूनिटीज के तुलबा के जज्बात मुतास्सिर हो सकते हैं। मंच ने हुकुमत से मांग की कि जारी हुक्म पर नजरशानी करते हुए इसे वापस लिया जाए। मंच ने सरकारी स्कूलों में ऐसा माहौल बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया जहां सभी तुलबा बिना किसी मजहबी इख्तेलाफ के मुसावात और एहतेराम के साथ ताअलीम हासिल कर सकें।
मंच ने कहा कि ताअलीमी इदारों की पहचान जामा और सेक्यूलर होनी चाहिए साथ ही हुकूमत को आईन के उसूलों के मुताबिक फैसले लेने चाहिए। इस दौरान मदीना मस्जिद के सदर हाजी जुबैर नियाज़ी, जामा मस्जिद के सदर मौलाना शहाबुद्दीन, हुसैनी मस्जिद के सदर फिरोज खान, रब मस्जिद, डिपो पारा, जावेद अहमद, नूरानी मस्जिद के सदर गुलाम गौस, हाजी सलीम समेत कसीर तादाद में मआशरे के लोग मौजूद थे।
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