जिल हज्ज, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
लोगों को अपने शर से महफूज़ कर दो, उन्हें तकलीफ ना पहुंचाओ के ये भी एक सदका है, जिसे आप खुद अपने आप पर करोगे।
- सहीह बुखारी
✅ मक्का मुकर्रमा से ज़ाकिर घुरसेना
हरम शरीफ में बाबे अब्दुल अजीज़ यानी मस्जिद-ए-हरम के गेट नम्बर 1 से दाख़िल होने पर सामने ही वह मुबारक सुतून नज़र आता है, जिससे बुराक़ को बाँधा गया था। मस्जिद अल हरम से हुज़ूर अकरम ﷺ को इसरा और सफर-ए-मेअराज कराने वाली उस नूरानी सवारी बुर्राक की रफ्तार बिजली और रोशनी की तरह तेज थी। अरबी ज़बान में बर्क का माना रोशनी होता है।
कुछ रिवायतों के मुताबिक हुज़ूर अकरम ﷺ मताफ़ में काबा शरीफ के करीब आराम फरमा रहे थे। जबकि कुछ रिवायतों में आता है कि आप ﷺ अपनी चचेरी बहन सय्यिदा उम्मे-हानी (रदिअल्लाहो अन्हा) के घर पर आराम फरमा रहे थे, तभी जिब्रीले अमीन आप 000 को सफर-ए-मेअराज के लिए तशरीफ लाए थे।
हरम शरीफ में बाबे अब्दुल अजीज़ यानी गेट नम्बर 1 से दाख़िल होने पर करीब ही बनें प्लेटफ़ॉर्म के दोनों तरफ़ ऊपर जाने के लिए चौड़ी सीढ़ियाँ मौजूद हैं। थोड़ी दूर आगे जाने पर कुछ सीढ़ियाँ नीचे की तरफ़ जाएँगी, जहां पहुंचते ही सामने खाना-ए-काअबा नज़र आता है। बाअज रियावतों में दाईं ओर वाला लाल सुतून तो बाअज रियायतों में बाईं ओर वाले लाल सुतून में बुर्राक को बांधे जाने का जिक्र है। बहरहाल, ये दोनों सुतून लाल रंग के अलग ग्रेनाइट के हैं। बाकी सुतून एक जैसे हैं।
ये सुतून मस्जिद-ए-हरम के दीगर सुतून की निस्बतन पतला और संगमरमर की बजाए लाल ग्रेनाइट का है। यहां से खाना-ए-काअबा बिल्कुल साफ नजर आता है। एक रियावत के मुताबिक ये जगह हुज़ूर पुरनूर ﷺ की चचेरी बहन सय्यिदा उम्मे-हानी (रदिअल्लाहो अन्हा) की रिहाईशगाह थी।मेराज का वो वाक़िआ सिर्फ़ एक तारीखी घटना नहीं, बल्कि ईमान, सब्र और अल्लाह पर यक़ीन का सबक़ है।
मुसीबतों के बाद आसानी
मेअराज का यह सफ़र उस वक़्त हुआ था, जब पैगंबर हजरत मोहम्मद ﷺ पर तकालीफ ढाई जा रही थी। इससे पता चलता है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को मुश्किलों के बाद इज़्ज़त और राहत अता फ़रमाता है।
नमाज़ मोमिन के लिए अज़ीम तोहफ़ा
मेअराज में उम्मत को नमाज़ का हुक्म मिला। इससे मालूम हुआ कि नमाज़ सिर्फ़ फ़र्ज़ नहीं, बल्कि अल्लाह से मिलने और दिल का सुकून पाने का ज़रिया है।
अल्लाह की क़ुदरत हर चीज़ पर भारी है
इंसानी अक़्ल जिस चीज़ को नामुमकिन समझे, अल्लाह के लिए वह मुश्किल नहीं। मेअराज हमें अल्लाह की बेमिसाल ताक़त का यक़ीन सिखाती है।
सच्चा ईमान हालात से नहीं बदलता
जब लोगों ने मेअराज का किस्सा सुना तो वो हैरान हुए, लेकिन सच्चे मोमिनों ने बिना झिझक उस पर यक़ीन किया।
मस्जिद अल हरम और मस्जिद अल अक्सा दोनों इस्लाम की अज़ीम निशानियाँ हैं। सफ़र-ए-मेराज हमें उम्मीद देता है, ज़िंदगी चाहे कितनी ही मुश्किल क्यों न हो, बंदा अगर अल्लाह से जुड़ा रहे तो उसके लिए रहमत के दरवाज़े खुलते ही हैं।

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