भिलाई का एक छोटे गांव से मिनी भारत बनने की कहानी है ज़ाकिर की किताब भिलाई जिंदाबाद

 'भिलाई जिंदाबाद' पर एक बा मानी बहस का हुआ एहतेमाम 
भिलाई की सनअती, समाजी और सकाफती तरक्की की जिंदा तारीख है "भिलाई जिंदाबाद" : डॉ महेशचन्द्र शर्मा 


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✅ बख्तावर अदब : भिलाई

    भिलाई वरिष्ठ नागरिक महासंघ के बैनरतले सियान सदन, वैशाली नगर में सीनियर सहाफी व मुसन्निफ मुहम्मद जाकिर हुसैन की नई किताब 'भिलाई जिंदाबाद -कुछ किस्से कुछ कहानियां' पर एक बा वकार और फिक्र अंगेज बहस का एहतेमाम किया गया। प्रोग्राम की सदारत मशहूर अदीब आचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने की। सीनियर सहाफी राजेन्द्र सोनबोईर, लाइफ एंड पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन, मुसन्निफ व सहाफी मुहम्मद जाकिर हुसैन के अलावा भिलाई वरिष्ठ नागरिक महासंघ के सदर घनश्याम कुमार देवांगन खुसूसी तौर पर मौजूद थे। 

    प्रोग्राम से खिताब करते हुए आचार्य डॉ महेश चंद्र शर्मा ने कहा, ये किताब महज यादों या वाकेआत का मजमुआ नहीं, बल्कि ये भिलाई के सनअती, समाजी व सकाफती तरक्की की जिंदा मिसाल है जो आने वाली पीढ़ी के लिए खास और मुस्तनद दस्तावेज साबित होगा। उन्होंने आगे कहा कि किताब पढ़ते हुए आप महसूस करेंगे जैसे इसमें भिलाई की रूह बस गई है। 

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    बहस की शुरुआत में महासंघ के सदर घनश्याम कुमार देवांगन ने मुसन्निफ मुहम्मद ज़ाकिर का ताअर्रुफ कराया और किताब में मौजूद मौजूद का मुख्तसर ब्यौरा पेश किया। उन्होंने कहा, मुसन्निफ ने भिलाई इस्पात संयंत्र के कयाम का तसव्वुर, सोवियत संघ का तकनीकी तआवुन व अमल-दर-आमद, सनअती हादसे, श्रमिक आंदोलनों, राजनीतिक एवं इंतेजामी कयादत, समाजी तब्दीलियां और मुख्तलिफ तारीखी घटनाओं आदि का ब्यौरा दिया है। मुख्तसर ये कि ये किताब भिलाई के जद्दो जहद और तरक्की की हकीकी कहानी पेश करती है। 

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    मेहमाने खुसूसी सीनियर सहाफी व दैनिक नवभारत के ब्यूरो प्रमुख राजेन्द्र सोनबोइर ने कहा, जाकिर हुसैन की लेखनी में सहाफी की पारखी नजर और मुसन्निफ के जज्बात दोनों पिन्हा होते है। उनकी जां फिशानी, लगन और मेहनत उन्हें दीगर मुसन्निफ और सहाफियों से अलग बनाती है। उनकी किताब रिसर्च स्कालर्स के लिए दस्तावेज का काम करेगी। उन्होंने जाकिर की ऐसी बा मानी किताबें आगे भी साया होते रहने की उम्मीद जताई। 

    मेहमाने खुसूसी लाइफ एंड पैरेंटिंग कोच चिरंजीव जैन ने कहा, भिलाई ने एजुकेशन हब के तौर पर भी शोहरत हासिल की है। यहां से निकले होनहार तुलबा ने हर शोबे में अपनी काबिलियत साबित की है। भिलाई की तरक्की में संयंत्र कर्मियों के साथ ही असातजा, मुसन्निफ, सकाफत के कारकुनों वगैरह का कलीदी किरदार रहा है। 

    प्रोग्राम से खिताब करते हुए मुसन्निफ मुहम्मद जाकिर हुसैन ने भिलाई की तरक्की के सफर के हर पड़ाव को खास बताते हुए कहा, 'भिलाई जिंदाबाद' महज एक किताब नहीं, बल्कि भिलाई की जिंदा यादों, जदद-ओ-जहद, हुसूल और इंसानी जज्बात का दस्तावेज है। इस किताब के जरिये उस भिलाई को अलफाज में संजोने की कोशिश की है, जिसने लाखों लोगों के ख्वाब को शक्ल दी है। उन्होंने किताब को पसंद करने के लिए कारईन और तआवुन करने वालों के तंई शुक्रगुजारी का इजहार किया। 

    वरिष्ठ नागरिक महासंघ की ओर से लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन व मेहमानों का इस्तकबाल किया गया। इस मौके पर लेखक जाकिर ने सियान सदन, वैशाली नगर को अपनी किताब भिलाई जिंदाबाद की कुछ कापियां तोहफतन पेश की। 

    इस मौके पर गायक जोसफ, संतोष शुक्ला एवं दिनेश गुप्ता ने गीत पेश किए। प्रोग्राम की कार्रवाई महासंघ के सदर घनश्याम कुमार देवांगन चलाई व खजांची दिनेश कुमार गुप्ता ने इजहारे तशक्कुर किया। 

    आखिर में विधायक रिकेश सेन के मरहूम बड़े भाई. दिनेश सेन, अतुल चंद साहू के मरहूम वालिद उत्तमचंद साहू व दिनेश गुप्ता के मरहूम चाचा केके गुप्ता को दो मिनट मौन रखकर खेराजे अकीदत पेश किया गया। 

    इस मौके पर राधेश्याम प्रसाद, दिनेश कुमार गुप्ता, धानेश्वर कुमार निर्मल, हुकुमचंद देवांगन, शिवप्रसाद साहू, गंगाचरण पुरोहित, रामाधार दिण्डे, संतोष शुक्ला, राजेन्द्र परगनिहा, निर्मलचंद्र शर्मा, सुरेशचंद्र जैन, ओमप्रकाश साहू, महेश रतनानी, रमेशचंद्र बटघरे, अशोक जज्ञासी, रामाधार वर्मा, सुरेन्द्र राय, देवेन्द्र चौहान, सुहास जोशी, एमएल गोपाल, रामबाबू गुप्ता, लेखक जाकिर हुसैन की बेटियां इनाया और अनाबिया सहित बड़ी तादाद में लोगों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। 





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