जिल हज्ज, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
जो शख्स अपने भाई के लिए उसकी पीठ पीछे दुआ करे तो जो फरिश्ता उसके लिए मुकर्रर है, वो कहता है, आमीन और तुम्हें भी उसके मानिंद अता हो।
-सहीह मुस्लिम
कई दहाईयों तक 9 जिलहज्ज को किया जाता था तब्दील
1000 किलो ग्राम ख़ाम रेशम, 120 किलोग्राम सोने के धागे
और 100 किलोग्राम चांदी के धागे का होता है इस्तिमाल
बख्तावर अदब : काअबा शरीफ का नया ग़िलाफ बनकर तैयार हो गया है। हर साल मुहर्रम उल हराम की पहली तारीख़ को ग़िलाफ़ तब्दील किया जाता है। पुरसुकून माहौल में हज 2026 के इख्तेताम के साथ ही ग़िलाफ़ तब्दील करने की तैयारी जारी हो गई है। गुजिश्ता दिनों ख़ादिम हरमैन शरीफ़ैन शाह सलमान की नियाबत करते हुए मक्का मुकर्रमा रीजन के नायब गवर्नर और मर्कज़ी हज कमेटी के नायब चेयरमैन शहज़ादा सऊद बिन मशाल बिन अबदुल अज़ीज़ ने नया ग़िलाफ (किसवा) कलीद बर्दार काअबा के हवाले किया गया।
सऊदी वज़ीर हज व उमरा, मस्जिद उल-हराम और मस्जिद उल नबवी 000 के उमूर के लिए जनरल अथार्टी के बोर्ड आफ़ डायरेक्टर्स के चेयरमैन डाक्टर तौफ़ीक़ अल रबीअह और कलीद बर्दार काअबा के नायब अबदुल मालिक ने दस्तावेज़ पर दस्तख़त किए।
सात मरहलों में तैयार होता है ग़िलाफ़
नए इस्लामी साल के आग़ाज़ के मौके पर हर साल एक मुहर्रम को ग़िलाफ़-ए-काअबा तबदील किया जाता है। इससे पहले कई दहाईयों तक ग़िलाफ़-ए-काअबा (किसवा) हर साल हज के दौरान 9 जिल हज्ज की सुबह आजमीने हज के मैदान अराफात रवाना होने के बाद तब्दील किया जाता था।
14 मीटर ऊंचे किसवा की पटटी 5 सेंटीमीटर चौड़ी और 47 मीटर लंबी होती है जो 16 पैनल्ज पर मुश्तमिल होती है। किसवा की तैयारी में तक़रीबन 1000 किलो ग्राम ख़ाम रेशम, 120 किलोग्राम सोने के धागे और 100 किलोग्राम चांदी के धागे का इस्तिमाल किया जाता है। किसवा को कुरआनी आयात और अरबी खत्ताती को स्याह रेशम पर सोने और चांदी के धागों से कशीदाकारी कर सजाया जाता है जो सदियों से काअबा मुशर्रफ की ताज़ीम से जुड़े अज़ीम इस्लामी विरसे की अक्कासी करता है।
किंग अबदुल अज़ीज़ किसवा काअबा काम्प्लेक्स में ग़िलाफ-ए-काअबा हर साल जदीद टेक्नोलोजी और माहिर सऊदी कारीगरों के हुनर को यकजा कर आला तरीन मयार के मुताबिक़ तैयार किया जाता है।


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