जिल हज्ज, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
जो शख्स अपने भाई के लिए उसकी पीठ पीछे दुआ करे तो जो फरिश्ता उसके लिए मुकर्रर है, वो कहता है, आमीन और तुम्हें भी उसके मानिंद अता हो।
-सहीह मुस्लिम
कई दहाईयों तक 9 जिलहज्ज को किया जाता था तब्दील
1000 किलो ग्राम ख़ाम रेशम, 120 किलोग्राम सोने के धागे
और 100 किलोग्राम चांदी के धागे का होता है इस्तिमाल
ज़ाकि़र घुरसेना : रायपुर
हरमैन शरीफैन में मुहर्रम के चांद की तस्दीक होने के साथ ही रॉयल क्लॉक टॉवर के ऊपर हरे रंग की लेज़र लाइट जल उठी। गौर तलब है कि मक्का मुकर्रमा का मक्का रॉयल क्लॉक टॉवर दुनिया की सबसे ऊंची इमारतों में से एक है। इसकी कुल ऊंचाई 601 मीटर (1,972 फीट) है। इस पर लगी लाईट्स की वजह से इसे 30 किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है।
मक्का मुकर्रमा के चारों तरफ वाके बड़े पहाड़ों की वजह से चांद आसानी से नजर नहीं आता यही वजह है कि चांद की तस्दीक होते ही क्लॉक टॉवर पर हरे रंग की लेजर लाईट रोशन कर दी जाती है जिससे एतराफ के लोगों को चांद की तस्दीक होने की इत्तेला हो जाए।
हर साल मुहर्रम उल हराम की पहली तारीख़ को काअबा शरीफ का नया ग़िलाफ ग़िलाफ़ तब्दील किया जाता है। पुरसुकून माहौल में हज 2026 के इख्तेताम के साथ ही ग़िलाफ़ तब्दील करने की तैयारी शुरु कर दी गई थी। गुजिश्ता दिनों ख़ादिम हरमैन शरीफ़ैन शाह सलमान की नियाबत करते हुए मक्का मुकर्रमा रीजन के नायब गवर्नर और मर्कज़ी हज कमेटी के नायब चेयरमैन शहज़ादा सऊद बिन मशाल बिन अबदुल अज़ीज़ ने नया ग़िलाफ (किसवा) कलीद बर्दार काअबा के हवाले कर दिया था।
और तब्दील कर दिया गया किसवा
नए इस्लामी साल के आग़ाज़ के मौके पर हर साल एक मुहर्रम को ग़िलाफ़-ए-काअबा तबदील किया जाता है। इससे पहले कई दहाईयों तक ग़िलाफ़-ए-काअबा (किसवा) हर साल हज के दौरान 9 जिल हज्ज की सुबह आजमीने हज के मैदान अराफात रवाना होने के बाद तब्दील किया जाता था।
शुरुआती दौर में इसे मिस्र में बनाया जाता था लेकिन 1962 से इसे मक्का शहर में ही बनाया जाने लगा। इसके लिए एक खुसूसी महकमा दारुल किसवा है जहां इसे तैयार किया जाता है।
किंग अबदुल अज़ीज़ किसवा काअबा काम्प्लेक्स में ग़िलाफ-ए-काअबा हर साल जदीद टेक्नोलोजी और माहिर सऊदी कारीगरों के हुनर को यकजा कर आला तरीन मयार के मुताबिक़ तैयार किया जाता है।



0 टिप्पणियाँ