जिल हज्ज, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
कामिल मोमिन वो है, जो खुश अखलाक हो और घर वालों से नरम सुलूक करने वाला हो।
- तिर्मिज़ी
✅ मक्का मुकर्रमा से जाकिर घुरसेना
मस्जिद-ए-नबवी ﷺ इबादत-ओ-रियाजत के दौरान कुछ आजमीने हज को मस्जिद के एक हिस्से की कालीन उठाकर देखने की हरकत दीगर आजमीने हज को हैरत में डाल देती है। पूछने पर पता चलता है कि मस्जिद के उस हिस्से में कभी एक कुआं हुआ करता था जिसे बाद में बंद कर दिया गया। अब वह हिस्सा मस्जिद की हद में है, कुएं के ऊपर एक खास रंग की कालीन बिछा दी गई है। इबादतगुजार वहां बैठकर इबादत-ओ-रियाजत करते हैं। ज्यादातर लोगों को इस बात का इल्म नहीं है कि जहां बैठकर वो इबादत कर रहे हैं, उसके नीचे एक मुबारक कुआं हुआ करता था।
कालीन और लाल घेरे के पीछे छुपी हुस्ने-इख्लाक और खुसूसे नियत की कहानी
कालीन हटाने पर नीचे लाल संगमरमर का घेरा नजर आता है। मस्जिद-ए-नबवी ﷺ का यह ख़ास मुक़ाम है, जो मस्जिद की बाकी सज़ावट से अलग और अनोखा है, उसके पीछे एक ऐसी कहानी छुपी है जो एक नेक-दिल सहाबी के हुस्न-ए-अख़लाक़ और ख़ुलूस-ए-नीयत की याद को ताज़ा करती है और जो पिछले 1400 सालों से मस्जिद-ए-नबवी ﷺ में इस्लाम और पैगंबर-ए-इस्लाम के तंई मुहब्बत की गवाही देती आ रही है।
हज़रत अबू तल्हा अंसारी रदिअल्लाहो अन्हो अंसार-ए-मदीना के बड़े और मालदार सहाबी थे। अल्लाह तआला ने आपको खेतों, खजूर के बाग़ों, ऊँटों और दौलत से नवाज़ा था। जब आपने इस्लाम कुबूल किया, तो अपनी सारी दौलत मुसलमानों में बाँट दी।
आपकी मिल्कियत में एक चीज़ थी जो आपके दिल के बहुत क़रीब थी, वह कुआं था, बैरुहा कहा जाता था। यह कुआँ मस्जिद-ए-नबवी के बिलकुल सामने था। इसका पानी साफ़, मीठा और पाक था, जिससे पूरा मदीना फ़ैज़याब होता था।
सबसे ख़ास बात यह थी कि पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ ख़ुद इसी कुएँ का पानी पीते थे और वुज़ू करते थे। यही वजह थी कि यह कुआँ अबू तल्हा रदिअल्लाहो अन्हों के लिए सबसे अज़ीज़ था।
फिर आया अल्लाह का हुक्म
तुम हरगिज़ भलाई को नहीं पा सकते, जब तक उस चीज़ को राह-ए-ख़ुदा में खर्च न करो, जो तुम्हें सबसे प्यारी हो। (तर्जुमा : आल-ए-इमरान 3:92)
ये आयत सुनते ही हज़रत अबू तल्हा रदि अल्लाहो अन्हो हाज़िर-ए-रसूल ﷺ हुए और बोले: ऐ अल्लाह के रसूल ﷺ! अल्लाह तआला ने हुक्म दिया है कि हम वही खर्च करें जो हमें प्यारा है। मेरे लिए सबसे प्यारी चीज़ यह बैरुहा है। मैं इसे अल्लाह की राह में वक़्फ़ करता हूँ। अल्लाह और उसका रसूल ﷺ जहां और जैसा इसका बेहतर इस्तेमाल समझें, वो करें।
ये सुनकर पैग़ंबर मुहम्मद ﷺ बहुत ख़ुश हुए और फ़रमाया : ये सौदा तुम्हारे लिए हमेशा सूदमंद साबित होगा। तब से लंबे अरसे तक वो कुआं मुसलमानों के लिए सदक़ा-ए-जारीया बना रहा लोगों को पानी पिलाता, रहमत बाँटता रहा।
बाद में मस्जिद-ए-नबवी ﷺ की तौसीअ की जरूरत पड़ी, वो कुआं मस्सजिद की हुदूद में आ गया। लेहाजा उसे बंद करना पड़ा। किंग फ़हद गेट से मस्जिद-ए-नबवी ﷺ में दाख़िल होने पर बाईं ओर दूसरे और तीसरे सुतून के बीच कालीन के नीचे आज उस मुबारक कुएं की नीशानी मौजूद है। जो आज भी उस अजीम सहाबी के ईमान, मोहब्बत और सख़ावत की गवाही देता है, जिसने अपनी सबसे अज़ीज़ चीज़ अल्लाह की राह में कुर्बान कर दी।


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