- जिल हज्ज, 1447 हिजरी- ﷽- फरमाने रसूल ﷺ
आज से 13 जिलहज्ज तक पढ़े तकबीरे तशरीक़
नवीं ज़िल्हिज्जा की फ़जर से तेरहवीं ज़िल्हिज्जा के असर तक अय्यामे तशरीक़ है। इस दौरान तकबीरे तशरीक अल्लाहो अक्बर अल्लाहो अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह व अल्लाहो अकबर अल्लाहो अकबर व लिल्लाहिल हम्द पढ़ने की बड़ी फजीलत आई है।कब पढ़ें :तकबीरे तशरीक़ हर फ़र्ज़ नमाज़ पंजगाना बा-जमाअत के बाद 1 बार पढ़ना वाजिब और 3 बार पढ़ना अफ़ज़ल है।तकबीरे तशरीक़ बा'आवाज़ बुलंद पढ़ना वाजिब है।तकबीरे तशरीक़ सलाम फेरने के फ़ौरन बाद पढ़ना होता है।अगर ताख़ीर किया, जैसे मस्जिद से बाहर चले गए या जानबूझकर वुज़ू तोड़ दिए तो अब इससे तकबीर साक़ित हो गई।औरतों पर तकबीरे तशरीक़ वाजिब नहीं।अकेले नमाज़ पढ़ने वालों पर तकबीर नहीं है, हाँ मगर पढ़ लें क्योंकि साहिबैन के नज़दीक उस पर भी वाजिब है।नफ़्ल, वाजिब, सुन्नत के बाद तकबीरे तशरीक़ नहीं। हां मगर ईद की नमाज के बाद पढ़ लें।- बहारे शरीअत, हिस्सा 04, सफ़ह न. 61-6
कुर्बानी के जज्बे के साथ 28 मई को ईद उल अजहा मनाई जाएगी। ईद की नमाज के लिए ईदगाहों और मस्जिदों में खास इंतजाम किए गए हैं। मौसम बदलने और बारिश होने की सूरत में नमाज के लिए अलग बंदोबस्त किया गया है। इसके साथ ही तीन दिन तक कुर्बानी का सिलसिला भी शुरू हो जाएगा। जिसमें लोग अपनी हैसियत के मुताबिक बकरों की कुर्बानी देंगे।
जामा मस्जिद, सेक्टर-6, ईदगाह मैदान में सुबह 8 बजे ईदुल अजहा की नमाज अदा की जाएगी। भिलाई नगर मस्जिद ट्रस्ट के सदर मिर्जा आसिम बेग ने बताया कि मौसम में बदलाव होने पर तमाम इंतजाम किए गए हैं। बारिश होने पर सुबह 7:30 बजे मस्जिद में पहली जमाअत होगी और उसके बाद जरूरत के मुताबिक आधे-आधे घंटे के वक्फे में जमाअत होगी।
शेर-ए-ख़ुदा ईदगाह मैदान, हाउसिंग बोर्ड में भी नमाज का वक्त सुबह 8 बजे का तय है। हजरत अल्लामा मौलाना, ताज़िम रज़ा मिस्बाही नमाज अदा कराएंगे। मौसम ख़राब होने की सूरत में ईद की नमाज़ शेर-ए-ख़ुदा मस्जिद, कैलाश नगर में अदा की जाएगी। शेर-ए-खुदा मस्जिद में पहली जमात सुबह 7:30 और दूसरी जमात 8:30 बजे होगी।
फरीद नगर ईदगाह में सुबह 7:30 बजे जमाअत होगी। मदनी मस्जिद जोन-1 में सुबह 8 बजे, हुसैनी मस्जिद करबला मैदान जीई रोड में सुबह 7:45 बजे जमाअत होगी। अशरफ़ी मस्जिद रूआबांधा भिलाई में पहली जमाअत सुबह 7 बजे इमाम कारी फारूख अशरफ़ी अदा करवाएंगे। जरूरत पड़ने पर दूसरी जमाअत 7:45 बजे मुफ़्ती मुहम्मद शाहिद अली मिस्बाही, प्रिंसिपल मदरसा ताजुल उलूम रुआबांधा भिलाई या क़ारी शमशीर अली अशरफ़ी अदा कराएंगे।
इबादत और नेकी कमाने का बेहतरीन दिन ईद उल अजहा
इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक जिलहिज्जा का महीना बेहद अहम है। इस मौके पर काजी-ए-शहर दारुल कजा, भिलाई, मुफ्ती मोहम्मद सोहेल ने कहा कि जिल हिज्जा के 10 दिन यानी एक से 10 तारीख तक गुनाहों से तौबा करने, अल्लाह की इबादत करने और नेकी कमाने के बेहतरीन दिन है। उन्होंने कहा, 9 जिलहज्ज अरफा का दिन कहा जाता है। इसके बारे मे पैगम्बर हज़रत मोहम्मद 000 ने कहा, अरफा का रोज़ा रखने वाले के एक साल के गुनाह माफ़ हो जाते है। मौलाना सैय्यद फैसल अमीन कहते हैं, यौमे अरफा के दिन सबसे पाक दिनों मे से एक है।
हाफिज अमान के मुताबिक ईद उल अजहा की माफी का सबसे बड़ा त्यौहार है। इसमें अल्लाह के नबी हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम व हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम की कुर्बानी को क़यामत तक आने वाले ईमान वालों के लिए एक बड़ी तालीम है। उन्होंने कहा, अल्लाह दिलों के भेद को भी जानता है मुत्तकी, परहेज़गार बनो।

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