नात शरीफ और सरस्वती वंदना के साथ रोशन की शमा, मंच पर नजर आया हिंदी-उर्दू का संगम

 सफर उल मुजफ्फर, 1448 हिजरी

   फरमाने रसूल      

जिसने मस्जिद तामीर की जिसमें अल्लाह का ज़िक्र किया जाता है अल्लाह तअला उसके लिए जन्नत में घर तैयार करेगा।

(सुनन इब्न माजाह)


आईना-ए-अदब की नशिस्त एक शाम मरहूम शायरों के नाम 

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✅ बख्तावर अदब : भिलाई 

    आईना-ए-अदब, उर्दू-हिंदी संगम तंजीम, भिलाई-दुर्ग की जानिब से एक शाम, मरहूम शायरों के नाम का गुजिश्ता दिनों इंडियन कॉफी हाउस, सुपेला में  इनएकाद किया गया।

     ➧ ➧ मजहब-ए-इस्लाम की रोशन तारीख, सकाफत और अदब से वाबस्तगी के लिए पढ़ते रहें ‘बख्तावर अदब’ … 

    इसकी शुरुआत शमा रौशन करने के बाद इरफान उद्दीन इरफान ने नात शरीफ और मिताली श्रीवास्तव वर्मा ने सरस्वती वंदना पेश की। मेहमान-ए-खुसूसी नीलम चंद सांखला, रिटा. जज, बिलासपुर हाईकोर्ट थे। सदारत उस्ताद शायर अब्दुस्सलाम कौसर, राजनांदगांव ने की। उर्दू के अफसाना निगार शायर डॉ. रौनक जमाल, दुर्ग, लतीफ खान लतीफ, दल्लीराजहरा, शायर अब्दुल वहीद खान, रिटा. सब डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर, दुर्ग, प्रदीप भट्टाचार्य, अध्यक्ष आरंभ, शायरा नुरुस्सबाह खान सबा, कला परंपरा के सदर डॉ डीपी देशमुख, रिसाली और कवि ओमप्रकाश शर्मा मेहमाने खुसूसी के तौर पर मौजूद थे।  

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     ➧ ➧ बख्तावर अदब : इस्लामी तारीख और उर्दू अदब का पहला और वाहिद न्यूज पोर्टल… 

    नशिस्त की सराहना करते हुए मेहमानों ने उर्दू-हिंदी अदब की तरक्की के लिए मिलजुल कर तआवुन करने की बात कही। इस दौरान 60 से ज्यादा हिंदी-उर्दू के अदीबों ने अपनी तख्लीकात पेश की, जिसे मेहमानों के साथ-साथ मौजूद लोगों ने भी सराहा।

    मेहमानों का इस्तकबाल आईना-ए-अदब  के सदर शायर हाजी रियाज खान गौहर, सरपरस्त शकील अहमद सिद्दीकी, को-आर्डिनेटर शौकत इकबाल, जावेद हसन, फरीदा शाहीन अंसारी, मोहम्मद अबू तारिक, मोहम्मद जाकिर हुसैन, डॉ. संजय दानी,  इस्माइल खान, डॉ. नौशाद अहमद सिद्दीकी, हाजी मिर्ज़ा इसराइल बेग शाद बिलासपुरी, शायर मुमताज, शमशीर शिवानी और राकेश कुमार रूसिया दीगर ने फूलों के हार पेश कर किया। 

याद किए गए मरहूम शाइर व अदीब 

नशिस्त में उन मरहूम शायरों व अदीबों को याद किया गया, जिन्होंने उर्दू और हिंदी साहित्य को मालामाल किया। इनमें आईना-ए-अदब की नींव रखने वाले मशहूर डाक्टर डॉ. जफर अहमद सिद्दीकी,  मजिस्ट्रेट इनामुल्लाह शाह, युसुफ मछली शहरी, सलीम अहमद जख्मी बालोदवी, पंडित गया प्रसाद खुदी, हाजी बदरुल कुरैशी बद्र, बाबा शेख निज़ाम दुर्गवी, नवाब जफ़र, ऐनमीम हैरत, शेख निजामुद्दीन उर्फ निज़ाम राही, सुल्तान जावेद, नदीम कानपुरी, खुर्शीद नज़मी, अंजारुल बर्क, वहीद खान बिलासपुरी, युनूस मछलीशहरी, शौक जालंधरी, रायपुर, अशोक सिंघई, प्रदीप वर्मा, जय नारायण सोनी निर्झर, राम कैलाश तिवारी, वीणापानी, हज़लकार रामबरन कोरी कशिश, डॉ. राधेश्याम सिंदूरिया, ओमप्रकाश शर्मा, मुक्तकंठ साहित्य समिति, भिलाई के जनरल सेक्रेटरी, रविशंकर कलोसिया, पंडित नंदकिशोर दुबे, पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे, मुकुंद कौशल, डॉ. त्रिलोकीनाथ क्षत्रिय, पंडित दानेश्वर शर्मा, कृष्णकांत कशिश, डॉ. विमल कुमार पाठक, हरि  शंकर उजाला,  डॉ. विधुरानी खरे, कवियत्री शांति काम्बोज डॉ. शीला शर्मा, आरसी मुदलियार, अरुण कसार, हसन ज़फ़र, रायपुर, रजा हैदरी, रायपुर, बीके दीवाना और केबीआर शर्मा समेत 50 से ज्यादा अदीबों को याद किया गया और उनकी तख्लीकात पर बात हुई।


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