जिल हज्ज, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
कामिल मोमिन वो है, जो खुश अखलाक हो और घर वालों से नरम सुलूक करने वाला हो।
- तिर्मिज़ी
✅ ज़ाकिर घुरसेना : मिना
मस्जिद अल-हरम से तक़रीबन 12 किलोमीटर की दूरी पर वाके मिना को तंबुओं का शहर भी कहा जाता है। ये दुनिया का सबसे बड़ा तंबुओं का शहर है। हज के दिनों में यहां हजारों की तादात में आजमीने हज के लिए खेमे लगाए जाते हैं। उस दौरान जिधर नजर जाती है, सफेद ख़ेमे ही नज़र आते हैं। आजमीने हज यहां आराम फरमाते हैं और इबादत-ओ-रियाजत करते हैं।
दूर से नजर आने वाले मामूली खेमों के भीतर आजमीने हज के लिए किसी फाईव स्टार जैसी सहूलत होती है। मौसम को देखते हुए रास्तों पर जगह-जगह नसब खंबों पर मिस्टिंग शावर लगे होते हैं जिससे निकले वाली पानी बौछारें माहौल को गर्म बनाने से रोकती है। लाखों की तादाद में आजमीने हज की मौजूदगी के बावजूद कहीं भी गंदगी नजर नहीं आती। सफाई ऐसी कि दिल बरबस ही इंतेजामिया की ताअरीफ कर उठता है।
मिना, मक्का मुकर्रमा और मैदान-ए-अराफ़ात के दरमियान उस रास्ते पर आबाद है, जहां से हुज्जाज ए कराम अराफ़ात की तरफ रवाना होते हैं। पूरा इलाका तक़रीबन बीस किलोमीटर तक फैला हुआ है। हज के दौरान दुनियाभर से आए लाखों हुज्जाज ए कराम मीना में क़याम करते हैं। 8 ज़िलहिज्जा को यहां पहुंचकर इबादत करते हैं। अराफ़ात और मुज़दलिफ़ा से वे सरे नौ मिना लौटते हैं।
यही है वो मुबारक मुकाम
वादी-ए-मीना वो मुबारक मुकाम है, जहां अल्लाह के हुक्म से हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने अपने बेटे हज़रत इस्माइल अलैहिस्सलाम को कुर्बान करना चाहा था। आज उस जगह पर निशानी के तौर पर एक टॉवर बना दिया गया हैं जो हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम और हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम की अल्लाह तआला से मुहब्बत की गवाही देता है। अल-खैफ मस्जिद के पीछे वाके इस मुबारक जगह पर पहुंचते ही आजमीने हज की आंखें नम हो जाती है।
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