हज 2026 पुरसुकून माहौल में मुकम्मल, हुज्जाज कराम की वापसी का सिलसिला शुरू

 जिल हज्ज, 1447 हिजरी 

   फरमाने रसूल   

कामिल मोमिन वो है, जो खुश अखलाक हो और घर वालों से नरम सुलूक करने वाला हो।

- तिर्मिज़ी 




✅ अर्सलान हाश्मी : मिना

    हज 1447 हिज्री, ब मुताबिक़ 2026 मिसाली इंतिज़ामात के साथ मुकम्मल हो गया। 18 लाख के क़रीब हुज्जाज ने मनासिक-ए-हज्ज रूहानी माहौल और पुरसुकून अंदाज़ में मुकम्मल किए, इस दौरान किसी को किसी किस्म की दुशवारी या हंगामी सूरत-ए-हाल का सामना नहीं करना पड़ा

    यौम अलतरवीह, 8 जिल हिज्ज से लेकर तशरीक़ के दूसरे दिन तक मुशाविर मुक़द्दसा में हुज्जाज की मूवमेंट इंतिहाई मुनज़्ज़म अंदाज़ में जारी रही

    हज के रुक्न-ए-आज़म वक़ूफ-ए-अर्फ़ा की अदायगी के लिए आज़मीन-ए-हज को मुशाविर मुक़द्दसा ट्रेन और बसों के ज़रीये मुक़र्ररा शैडूल के मुताबिक़ मुंतक़िल किया गया।

    वकूफ़-ए-अर्फ़ा के बाद हुज्जाज की मुज़दल्फ़ा आमद के मराहिल भी इंतिहाई मुनज़्ज़म अंदाज़ में तय पाए गए, हुज्जाज ने मुज़दल्फ़ा के मैदान में मग़रिब-ओ-इशा की नमाज़ें क़सर-ओ-जमा की सूरत में अदा कीं, बाद अज़ां रमी जुमरात के लिए कंकरियां चुनी और खुले आसमान तले रात गुज़ारने के बाद सुब्ह-सवेरे वादी-ए-मिना के लिए रवाना हुए। 

    मक्का मुकर्रमा में मुशाविर मुक़द्दसा जाने वाले रास्तों पर दसियों चैक पोस्ट क़ायम की गई थीं, जहां हर शख़्स का हज परमिट और नसक़ कार्ड चेक किया गया। चेक पोस्टों का मक़सद हज ऑप्रेशन को मुनज़्ज़म बनाना और गै़रक़ानूनी हज करने वालों को मुशाविर में दाख़िल होने से रोकना था, ताकि बैरून ममलकत से आने वाले हुज्जाज पुरसुकून अंदाज़ में फ़रीज़ा हज अदा कर सकें।

    सिक्योरिटी अहलकारों के हमराह शहरी दिफ़ा, स्काउट्स, रज़ाकार, हिलाल अलाहमर, ट्रैफ़िक पुलिस और फ़लाही तन्ज़ीमों के नुमाइंदे भी हुज्जाज की ख़िदमत में पेश पेश रहे।




    साल-ए-रवां सऊदी हुकूमत की जानिब से मैदान-ए-अर्फ़ात ख़ासकर जबल अल रहमा पर हुज्जाज को लू से महफ़ूज़ रखने के लिए ख़ुसूसी इंतिज़ामात किए गए थे। जबल अल रहमा के अतराफ़ में ग्राउंड एयर कंडीशन्ज़ का एहतिमाम काबिल-ए-ज़िक्र है जिसकी वजह से माहौल बेहतर रहा।

    मैदान-ए-अर्फ़ात में साल-ए-रवां दरख़्तों की तादाद में भी इज़ाफ़ा देखा गया, इसके अलावा मुख़्तलिफ़ मुक़ामात पर हुज्जाज को साया फ़राहम करने और गर्मी की शिद्दत कम करने के लिए शेडज़ की तादाद भी बढ़ाई गई, शेडज़ पर पानी की फुवार बरसाने वाले ख़ुसूसी पंखे भी नसब किए गए थे जिसकी वजह से माहौल काफ़ी ठंडा रहा।

    वज़ारत-ए-सेहत और हिलाल अलाहमर की कारकर्दगी मिसाली रही, मुशाविर में जगह-जगह हिलाल अलाहमर के यूनिट्स तयनात थे, रवां बरस इलैक्ट्रॉनिक व्हील चेयरज़ एंबुलेंस का ख़ुसूसी बंद-ओ-बस्त था जिससे बीमार या ज़ख़मी हाजी को फ़ौरी तौर पर फ़रस्ट एड की फ़राहमी को यक़ीनी बनाया जा सके। 

    मुशाविर की सफ़ाई को मुस्तक़िल बुनियादों पर यक़ीनी बनाने के लिए म्यूंसिपल्टी ने इज़ाफ़ी अहलकारों को तयनात किया था जबकि कचरा इकठ्ठा करने के लिए बड़े बड़े डम्परज़ नसब किए गए जिनमें कचरा कंप्रेस कर हज के बाद उन्हें वहां से निकाला जाता है।

    नेशनल सिक्योरिटी इदारे की जानिब से मुशाविर मुक़द्दसा की मुस्तक़िल बुनियादों पर फ़िज़ाई निगरानी का अमल जारी रहा। मुशाविर में ट्रैफ़िक को रवां रखने के लिए मर्कज़ी कंट्रोल रुम क़ायम किया गया था। वज़ारत-ए-माहौलियात के ख़ुसूसी यूनिट्स भी मुशाविर में तयनात थे जो मौसम के अहवाल से मुस्तक़िल बुनियादों पर मतला करते रहे। मुख़्तलिफ़ ज़बानों के माहिरीन की ख़िदमात हुज्जाज की रहनुमाई के लिए फ़राहम की गई थी जिसके सबब दुनियाभर के लोगों को किसी किस्म की दुश्वारी न हो। 

उर्दू न्यूज से ब शुक्रिया


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