शाअबान उल मोअज्जम, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
"वो शख्स जन्नत में दाखिल नही होगा, जिसकी शरारतों से उसका हमसाया (पड़ोसी) बे ख़ौफ़ नही रहता।"
- मुस्लिम
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फिल्मकार अनुराग बसु ने किया ज़ाकिर की किताब भिलाई ज़िंदाबाद का इजरा
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फिल्मकार अनुराग बसु के साथ किताब के मुसन्निफ व सहाफी मुहम्मद ज़ाकिर हुसैन |
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✅ बख्तावर अदब : रायपुर
इस्पात नगरी के सहाफी व मुसन्निफ मुहम्मद जाकिर हुसैन की नई किताब 'भिलाई जिंदाबाद, कुछ किस्से-कहानियां' का फिल्मकार अनुराग बसु के हाथों रस्मे इजरा अमल में आया।
पुरखौती मुक्तांगन, राजधानी, नवा रायपुर में ममुनाकिद 'साहित्य उत्सव' के इख्तेताम के मौके पर अनुराग ने किताब का इजरा करते हुए इस्पात नगरी, भिलाई पर मबनी दिलचस्प मवाद को सराहा और मुसन्निफ ज़ाकिर को मुबारकबाद दी।
वैभव प्रकाशन, नई दिल्ली-रायपुर से साया इस किताब में इस्पात नगरी, भिलाई के स्थापना काल से अब तक के अहम और दिलचस्प वाकेआत को लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने बहुत खूबसूरती से कलमबद्ध किया है।
गौरतलब है कि शहरे भिलाई, खुसूसन इस्पात कारखाना पर मबनी ज़ाकिर की इससे पहले दो दीगर किताबें 'भिलाई, एक मिसाल' और 'वोल्गा से शिवनाथ' तक मंजरे आम पर आ चुकी है।
वैभव प्रकाशन, नई दिल्ली-रायपुर से साया इस किताब में इस्पात नगरी, भिलाई के स्थापना काल से अब तक के अहम और दिलचस्प वाकेआत को लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने बहुत खूबसूरती से कलमबद्ध किया है।
गौरतलब है कि शहरे भिलाई, खुसूसन इस्पात कारखाना पर मबनी ज़ाकिर की इससे पहले दो दीगर किताबें 'भिलाई, एक मिसाल' और 'वोल्गा से शिवनाथ' तक मंजरे आम पर आ चुकी है।
भिलाई ज़िंदाबाद में क्या है खास
इस्पात नगरी, भिलाई के वजूद में आने से लेकर अब तक के कुछ दिलचस्प और हैरतअंगेज वाकेआत को लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने अपनी इस किताब में दर्ज किया है। इनमें खुसूसी लोगों के इस्पात नगरी आमद से लेकर भिलाई को बार-बार झकझोर देने वाले कई तनाव भरे दिन और हादसों का भी तफसील से जिक्र है। साथ ही गैर मुल्कों में भिलाई का परचम फहराने वाली कुछ हस्तियों का भी किताब में जिक्र है।


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