रबि उल आख़िर, 1448 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
उम्मूल मोमिनिन हज़रत आयशा रदि अल्लाहु ताअला अन्हू से रिवायत है कि नबी करीम ﷺ मकान में तशरीफ़ लाए, देखा कि रोटी का टुकड़ा पड़ा है, उसे उठाया, पोछा और खा लिया। और फरमाया, आयशा, अच्छी चीज़ का एहतराम करो। ये चीज़ यानी रोटी जब किसी कौम से भागती है तो लौट कर नहीं आती।
- इब्न मजाह
मस्जिद में बिछी है 25 हज़ार कालीन, हर रोज होती है सफाई और देखभाल
रियाद
मस्जिद-ए-नबवी ﷺ में नमाजियों की सहूलत के लिए जदीद टेक्नालोजी से बनी 25 हजार कालीने बिछी है जिनकी हर रोज जदीद तरीके से सफाई और देखभाल होती है। इन 25 हज़ार में से 14 हज़ार कालीनें सेहनों में बिछाई जाती है जबकि 6 हज़ार 150 राहदारियों और 5 हज़ार 500 क़ालीन मस्जिद की छत पर बिछाए जाते हैं।
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दोनों मुक़द्दस मसाजिद मस्जिद-ए-नबवी ﷺ और मस्जिद अल हरम में बिछी कालीनें की सफाई के लिए जनरल अथार्टी की जानिब से मूसिर इंतिज़ामात किए गए हैं जिसके तहत दिन में चार मर्तबा 430 जदीद मशीनों की मदद से सफाई की जाती है जबकि रोज़ाना 400 से ज़ाइद क़ालीन धोए जाते हैं। यही नहीं, दिनभर में 70 मर्तबा कालीनों का मुआइना और मेंटेनस का एहतिमाम किया जाता है। कालीनों को सेनेटाइज़ और मुअत्तर करने के लिए 450 लीटर से ज़्यादा सेनेटाइज़र और 250 लीटर से ज़्यादा खुशबू इस्तिमाल की जाती हैं।
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मस्जिद-ए-नबवी ﷺ में बिछी 16 मिलीमीटर मोटी इन कालीनों की पहचान आला मेयार की हुनरमंदी और रंग की पाएदारी से की जाती है। ्र
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ये तमाम इक़दामात मस्जिद नबवी ﷺ में ज़ाइरीन और नमाज़ियों को एक महफ़ूज़ और रुहानी माहौल फ़राहम करने के हवाले से अथार्टी के अज़म को ज़ाहिर करते हैं।

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