बिना एहराम नहीं मिलती एंट्री, तवाफ के लिए लगाना पड़ता है लंबा चक्कर

 जिल हज्ज, 1447 हिजरी 

फरमाने रसूल ﷺ

क्या मैं तुम्हें ये ना बता दूँ के जहन्नुम किस पर हराम है? फिर फरमाया जहन्नुम उस शख्स पर हराम है, जो लोगों के साथ नरमी और सहूलियत के मामला इख्तियार करें।

- तिर्मिज़ी 


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✅ मक्का मुकर्रमा से ज़ाक़िर घुरसेना 

    हरम शरीफ में उमराह जायरीन के लिए ड्रेस कोड जरूरी है। दीगर लिबास में काअबा शरीफ का तवाफ किया जा सकता है लेकिन उमराह के लिए एहराम और नियत जरूरी है। कुछ जायरीन एहराम के बिना ही काअबा शरीफ की हद में दाखिल होना चाहते हैं, लेकिन गेट पर तैनात गार्डस उन्हें भीतर दाखिल नहीं होने देते। ऐसे लोगों का तवाफ के लिए पहले-दूसरे माले पर जाना होता है जिसका दायरा काफी वसीअ होता है। 

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    जबकि एहराम की हालत में जायरीन गेट नंबर एक जिसे बाबे मलिक फ़हद या किंग अब्दुल अजीज भी कहा जाता है और जो क्लॉक टॉवर के बिल्कुल सामने है, इस गेट से सिर्फ एहराम की हालत में ही दाखिल हुआ जा सकता है। यहां से काअबा शरीफ का तवाब करने का मतलब काअबे शरीफ के बिल्कुल करीब से तवाफ करना होता है। यहां से तवाफ करने पर खाना ए काबा के दरवाज़े सहित चारों कोनों यमनी, इराकी और शामी कोने के अलावा मकामें इब्राहीम और हतीम के नज़दीक से तवाफ अदाब होता है। यही नहीं, यहां से तवाफ करने पर हजरे असवद, हतीम, मकामे इब्राहिम और खाने काअबा का बोसा भी लिया जा सकता है। 

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    गौरतलब है कि हतीम पहले खाना-ए-काबा का ही हिस्सा था, यहां नमाज़ अदा करने से खाना-ए-काअबा के भीतर नमाज़ पढ़ने का सवाब मिलता है।

कई मुल्कों के आजमीने हज का होता है अपना ड्रेस कोड

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    कुछ मुल्कों के आजमीने हज ग्रुप में होते हैं, उनका अपना ड्रेस कोड होता है। हज के दौरान देखा गया है कि ग्रुप के आजमीने हज एहराम के अलावा एक सी चादर ओढ़े होते हैं, उनका अपना एक अमीर मुतअईय्यन होता है। सब एक साथ लब्बैक की सदा बुलंद करते हैं। यहां तक कि दुआ और कलमात भी एक साथ ही अदा करते हैं। इतना ही नहीं, इनके लगेज (सूटकेस) भी एक ही रंग और साईज का होता है। बोली और जबान जुदा होने के बावजूद उन्हें एक सी चादर में एक साथ लब्बैक या रसूल अल्लाह की सदा बुलंद करते देखना, रूहानी एहसास करा जाता है। 


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