ईद उल अजहा पर दुआओं के लिए उठे हाथ, मुल्क, रियासत व अवाम की खुशहाली की मांगी दुआएं

 जिल हज्ज, 1447 हिजरी 

   फरमाने रसूल   

कयामत के दीन मोमिन के मीज़ान में अखलाक-ए-हसना (अच्छे अखलाक) से भारी कोई चीज़ नहीं होगी, और अल्लाह ताअला बेहया और बदज़बान से नफरत करता है।

- जमाह तिर्मिज़ी 


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✅ बख्तावर अदब : खैरागढ़

    खुदा से मोहब्बत व कुर्बानी की अलामत ईद उल अजहा पर मआशरे ने दाऊचौरा में वाके ईदगाह के अलावा मुकामी मसाजिद में नमाज अदा कर मुल्क, रियासत व अवाम की खुशहाली, तरक्की, भाईचारगी और अम्नो-अमान के लिए दुआएं की। ईदगाह में जामा मस्जिद के इमाम-ओ-खतीब मोहम्मद फखरुद्दीन रिज़वी ने अदा कराई। खुत्बा व सलात-ओ-सलाम के बाद लोगों ने एक-दूसरे को ईद की मुबारकबाद दी। 

खुदा से मोहब्बत के जज्बे की वो अज़ीम मिसाल

जिला मुस्लिम समाज व इकरा फाउंडेशन के सेक्रेटरी मोहम्मद याह्या नियाज़ी ने बताया कि मैदान-ए-अराफात में हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने आज ही के दिन अपने बेटे हजरत इस्माईल अलैहिस्सलाम को खुदा की राह में कुर्बान करना चाहा था। ये दरअसल खुदा की तरफ से हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम इम्तिहान था। उम्मते मुसलमां हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के उसी जज़्बे की याद में ईद-ए-कुर्बां मनाता है। उन्होंने बताया कि खुदा ने पैगंबर इब्राहिम अलैहिस्सलाम से ख्वाब में उनकी सबसे प्यारी चीज़ की कुर्बानी मांगी थी। ख्वाब की ताबीर जानकर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने एक-एक कर उन सभी की कुर्बानी दे डाली जो उन्हें प्यारी थी लेकिन उनकी कोई कुर्बानी कुबूली नहीं हुई। जिसके बाद आपने अल्लाह को राज़ी करने के लिए अपने प्यारे बेटे हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम को कुर्बान करना चाहा। 

अपने तंई हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की मोहब्बत देख अल्लाह की रहमत को जोश आया और अल्लाह ने जिब्रीले अमीं के जरिये हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के बेटे की जगह एक दुंबा रखवा दिया। नमाज अदा कर मआशरे ने अपने मरहूमीन की मगफिरत के लिए कब्रिस्तान जाकर फातेहा पढ़ी। ईदगाह कैंपस में अम्नो-अमान बनाए रखने में थाना इंचार्ज अनिल शर्मा की कयादत में पुलिस के जवानों ने कलीदी किरदार अदा किया। 


    इस मौके पर हाफिज मुहिब्बुल हक, हाफिज सराफत हुसैन, साबिक सदर व नपा के नायब सदर अब्दुल रज्जाक खान, सदर अरशद हुसैन, साबिक नायब सदर जफर हुसैन खान, इकरा फाउंडेशन के सदर खलील कुरैशी, नसीम कादरी, सादिक मेमन, वसीम कादरी, हाजी नासीर मेमन, हाजी रिज़वान मेमन, हाजी तनवीर मेमन, हाजी ईमरान मेमन, हाजी मोहसिन अली, हाजी सैय्यद जाहिद अली, हाजी मुर्तजा खान, मोहम्मद इदरीश खान, शेख लतीफ खान, कय्यूम कुरैशी, सैय्यद लुकमान अली, सगीर कुरैशी, शमशुल होदा खान, डॉ. मकसूद अहमद, जफर उल्लाह खान, अय्यूब सोलंकी, जुनैद खान, असद उल हक, समीर कुरैशी, रियाजुद्दीन कादरी, सैयद अल्ताफ अली, शौकत अली, कदीर कुरैशी, जाकिर हुसैन, इरफान मेमन, तज‌म्मुल अली, रफ़ीक सरधारिया, रफीक सोलंकी, जाफर झाड़ूदिया, रियाज़ अशरफी, मतीन अशरफ, उबैद खान, जमीर खान, तारिक अमान, सोहेल खान, शादाब खान, जमील मेमन, नदीम मेमन, राजा सोलंकी व ईमरान अशरफी समेत कसीर तादाद में मआशरे के लोग मौजूद थे। 


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