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रमजान उल मुबारक, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
"तुम अपने लिए भलाई के अलावा कोई और दुआ ना करो क्योंकि जो तुम कहते हो उस पर फरिश्ते आमीन कहते है।"
- मुस्लिम
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✅ मुहम्मद जाकिर हुसैन : भिलाई
शहर के नौकरी पेशा लोग भी माहे रमजान में रोजा रख रहे हैं। इस दौरान अपने कामकाज के साथ-साथ इबादत भी खूब कर रहे हैं। खासकर सरकारी नौकरियों के साथ रोजेदार माहे रमजान की तमाम जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं।
ड्यूटी करते हुए रोजा रखने में नहीं होती कोई परेशानी : असलम
शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम चरोदा, भिलाई 3 के बीईईटीओ सैय्यद असलम कहते हैं, रोज़ा, अल्लाह की बेहतरीन इबादत है जिसे हर बालिग मर्द और औरत को रखना चाहिए। हदीस का मफहूम है कि सभी इबादतों का दरवाजा रोजा है। वे कहते हैं, ड्युटी करते हुए रोजे की हालत में काम करने में कोई परेशानी नहीं होती है। सहयोगी साथी काम में मदद करते हैं। सैय्यद असलम कहते हैं इस मुबारक महीने में अपने लिए, अपने घर वालों के लिए, खानदान वालों के लिए, पड़ोसी, दोस्त-अहबाब, रिश्तेदारों और अपने मुल्क के लिए दुआ करें। खूब इबादत करें।
नहीं होती कोई परेशानी : मेअराज
भिलाई इस्पात संयंत्र कोक ओवन बैटरी-11 सीडीसीपी में चार्जमैन मेअराज अकरम कहते हैं, रमजान का मुबारक महीना इबादतों का महीना है। प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वस्सलम ने हमें जो तालीम दी है, उस पर चलने पर कामयाबी है। अपने काम की जगह गर्मी के बावजूद रोज़ा रखते हुए इस महीने की बरकत और रहमतों को पाने की कोशिश है। जनरल शिफ्ट रहती है इसके बावजूद सभी काम करने में और रोजा रखकर तरावीह पढ़ने में कठिनाइयां नहीं होती है। यह महीना सब्र का है। हदीस में आता है कि रोजे का बदला अल्लाह खुद देते हैं।
बरकतों का महीना है रमजान : ऐमन
भिलाई इस्पात संयंत्र, ऊर्जा प्रबंधन विभाग में सीनियर मैनेजर ऐमन अली कहते हैं कि माहे रमज़ान बड़ा बरकतो वाला महीना है। रोजा रखने से भूख प्यास की शिद्दत पता चलती हैं। गरीबी के चलते जिन्हें खाना मयस्सर नहीं होता, उनके तंई रहमदिली पैदा होती है। रोज़ा संयम और सब्र पैदा कर जिंदगी गुजारने की बेहतरीन इबादत है। ये महीना गरीब, बेसहारा, मिस्कीन, यतीमों और बेवाओं की मदद करने की तरगीब देता है। जहां तक काम के जगह की बात है, रोजे की हालत में भी अपनी जिम्मेदारयों को बखूबी अंजाम देते हैं।
हिदायत का महीना है रमजान : नासिर
सुपेला संडे बाजार के कपड़ा व्यापारी नासिर कुरैशी कहते हैं कि रमजान का महीना सभी लोगों के लिए खैरो बरकत और हिदायत लेकर आता है। रोज़ा रखने वाले को चाहिए कि उसके आदाब जो बताए गए हैं, उन पर अमल करें। रोज़ा रखकर हर बुराई से बचने की कोशिश करें और नेक काम और अल्लाह को राज़ी करने वाले कामों को करें और हुजूर की सुन्नतों को अपनी जिंदगी में लाने की कोशिश करें ताकि दुनिया में सादगी, अमन और खुशहाल पाकीजा माहौल बने।




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