----------------------
जीअकादा, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
✅ डाक्टर नौशाद सिददीकी : भिलाई
मुद्दतों हमने जमाने को दिया दर्से-हयात,मुद्दतों तक हमें रोएंगे जमाने वाले।
- ज़ुबैर मुरादाबादी
बदहालियों को मेरी न हँस-हँस के देखिए,हूं वक्त का शिकार, तमाशा नहीं हूं मैं।
-अशोक साहिब गुलावटी
हकीकतों को दिखाना ही मेरी फितरत है,यह आप खूब समझ लें के आइना हूं मैं।
-बिस्मिल भोजपुरी
अपने हाथों ही परेशान है उम्मत तेरी,उसके उलझे हुए हालात को शाना दे-दे।
- नियाज अजीजी
जो उनके कूचे से इक बार मैं गुजर जाऊँ,तो जिन्दगी की हर इक राह पार कर जाऊँ।
-नूर कादरी मुरादाबादी
मैं बे-वफा कहूँ या कहूँ बा-वफा तुझे,उलझन में पड़ गया हूँ, कहूँ और क्या तुझे।
- साबिर माइल भोजपुरी
मुझे आप ने बुलाया यह करम नहीं तो क्या है,मेरा मर्तबा बढ़ाया, यह करम नहीं तो क्या है।
- हाफिज सईदुर्रहमान
आप के आने से आयी है वफा की खुश्बू,गुल खिले और बहारों ने गजब ढाया है।
- फरहत अली फरहत पीपलसानवी
जाना कहां था हम को गए हैं किधर से हम,दिल को बचा सके कहां रश्के-कमर से हम।
- अब्दुल करीम मुरादाबादी
दो दिलों का फासला मिटने नहीं देते हैं जो,ऐसे लोगों से हमेशा फासला रखता हूँ मैं।
-डा आजम बुराक
हार मेरी उसे गवारा नहीं,इसलिए मैं किसी से हारा नहीं।
- हकीम जफर जसपुरी
जो गुजर गया गैर इरादतन दूर रह के तुझसे,वो हरेक लम्हा मुझे था यौम-ए-हिसाब सा कुछ।
- इरफान हमीद काशीपुरी
जाते हुए यूं उसको पुकारा ही नहीं था,वो शख्श हकीकत में हमारा ही नहीं था।
-नसीम अख्तर भोजपुरी
मिट्टी की हरेक पेशानी पर चांदी का करम कब देखा है,मजदूर के हाथों में तुमने सोने का कलम कब देखा है।
- उस्ताद शायर अकीम उद्दीन अकीम मण्डावरी बिजनौर
जुल्मों को मिटाने को भी तैयार रहो तुम,मजलूम के हर लम्हा तरफदार रहो तुम।
- नफीस पाशा
जाम नजरों से पिलाने का हुआ था वादा,टालिए मत हमें अंगूर का पानी दे कर।
- सरफराज हुसैन फराज पीपलसानवी

0 टिप्पणियाँ