अपने हाथों ही परेशान है उम्मत तेरी.. फराज़ एकेडमी की नशिस्त ने बांधा समा

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 जीअकादा, 1447 हिजरी 

   फरमाने रसूल    

उम्मूल मोमिनिन हज़रत आयशा रदि अल्लाहु ताअला अन्हू से रिवायत है कि नबी करीम ﷺ मकान में तशरीफ़ लाए, देखा कि रोटी का टुकड़ा पड़ा है, उसे उठाया, पोछा और खा लिया। और फरमाया, आयशा, अच्छी चीज़ का एहतराम करो। ये चीज़ यानी रोटी जब किसी कौम से भागती है तो लौट कर नहीं आती। 
- इब्न मजाह
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hamza travel tales


✅ डाक्टर नौशाद सिददीकी : भिलाई

    फ़राज़ अकेडमी की जानिब से गुजिश्ता दिनों मुनाकिद शुअरा की नशिस्त में आसपास के नामवर शुअरा ने देर रात तक अपने कलाम से लोगों को बांधे रखा। 
    मोहल्ला पीरुचाह, पीपलसाना, जिला मुरादाबाद (उत्तर प्रदेश) में मुनाकिद ऑल इंडिया शेअ़री नशिस्त की सदारत जसपुर, उत्तराखंड के हकीम जफर ने की और निजामत के फराइज सरफराज हुसैन फराज ने अंजाम दिए। मेहमाने खुसूसी इरफान हमीद, काशीपुरी थे। इनके अलावा नसीम अख़्तर, भोजपुरी और मेहमान-ए-जी-वकार याकूब हुसैन राज, अफजलपुरी थे। महफिल का आगाज मौलाना नियाज ने आयत-ए-करीमा की तिलावत से किया। अब्दुल हमीद बिस्मिल भोजपुरी व साबिर पीपलसानवी ने नात-ए-रसूल 000 पेश की। जिसके बाद फरीद आलम कादरी, मुरादाबादी ने गज़ल पेश कर महफिल की बाकायदा शुरुआत की। 
    
मुद्दतों हमने जमाने को दिया दर्से-हयात,
मुद्दतों तक हमें रोएंगे जमाने वाले।

                                        - ज़ुबैर मुरादाबादी 

बदहालियों को मेरी न हँस-हँस के देखिए,
हूं वक्त का शिकार, तमाशा नहीं हूं मैं।

                                        -अशोक साहिब गुलावटी 

हकीकतों को दिखाना ही मेरी फितरत है,
यह आप खूब समझ लें के आइना हूं मैं।

                                        -बिस्मिल भोजपुरी 

अपने हाथों ही परेशान है उम्मत तेरी,
उसके उलझे हुए हालात को शाना दे-दे।

                                        - नियाज अजीजी

जो उनके कूचे से इक बार मैं गुजर जाऊँ,
तो जिन्दगी की हर इक राह पार कर जाऊँ।

                                        -नूर कादरी मुरादाबादी 

मैं बे-वफा कहूँ या कहूँ बा-वफा तुझे,
उलझन में पड़ गया हूँ, कहूँ और क्या तुझे।

                                        - साबिर माइल भोजपुरी 

मुझे आप ने बुलाया यह करम नहीं तो क्या है,
मेरा मर्तबा बढ़ाया, यह करम नहीं तो क्या है।

                                        - हाफिज सईदुर्रहमान

आप के आने से आयी है वफा की खुश्बू,
गुल खिले और बहारों ने गजब ढाया है।

                                        - फरहत अली फरहत पीपलसानवी 

जाना कहां था हम को गए हैं किधर से हम,
दिल को बचा सके कहां रश्के-कमर से हम।

                                        - अब्दुल करीम मुरादाबादी 

दो दिलों का फासला मिटने नहीं देते हैं जो,
ऐसे लोगों से हमेशा फासला रखता हूँ मैं।

                                        -डा आजम बुराक

हार मेरी उसे गवारा नहीं,
इसलिए मैं किसी से हारा नहीं।

                                        - हकीम जफर जसपुरी 

जो गुजर गया गैर इरादतन दूर रह के तुझसे, 
वो हरेक लम्हा मुझे था यौम-ए-हिसाब सा कुछ।

                                        - इरफान हमीद काशीपुरी

जाते हुए यूं उसको पुकारा ही नहीं था,
वो शख्श हकीकत में हमारा ही नहीं था।

                                        -नसीम अख्तर भोजपुरी 

मिट्टी की हरेक पेशानी पर चांदी का करम कब देखा है,
मजदूर के हाथों में तुमने सोने का कलम कब देखा है।

                                        - उस्ताद शायर अकीम उद्दीन अकीम मण्डावरी बिजनौर

जुल्मों को मिटाने को भी तैयार रहो तुम,
मजलूम के हर लम्हा तरफदार रहो तुम।

                                        - नफीस पाशा

जाम नजरों से पिलाने का हुआ था वादा,
टालिए मत हमें अंगूर का पानी दे कर।

                                        - सरफराज हुसैन फराज पीपलसानवी

    नशिस्त में हाजी अमीर हुसैन, रियाज अन्सारी, नातिक सुल्तान, मास्टर इन्तेखाब, शाहिद हुसैन, मोहम्मद उमर, इन्तेजार, सद्दाम हुसैन, अफसर अली, मोहम्मद शाहनवाज हुसैन, कशिश, शम्मी, रहनुमा, आलिमा, मास्टर फुरकान, हाफिज जीशान, शफी, रईस जहां, मोहम्मद निजाम, खालिद हापुड़ी, मोहम्मद फैज, इस्मत, रिजवाना, गुलशेर, दिलनवाज वगैरह ने शोअरा हजरात की पेशकश को सराहा और महफिल को रौनक बख्शी। 
    अखिर में मुशायरा कन्वीनर रिजवाना नर्गिस ने नशिस्त की कामयाबी के लिए इजहारे तशक्कुर किया। 



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