मुहर्रम उल हराम, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
कयामत के दीन मोमिन के मीज़ान में अखलाक-ए-हसना (अच्छे अखलाक) से भारी कोई चीज़ नहीं होगी, और अल्लाह ताअला बेहया और बदज़बान से नफरत करता है।
- जमाह तिर्मिज़ी
मुहर्रम उल हराम, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
कयामत के दीन मोमिन के मीज़ान में अखलाक-ए-हसना (अच्छे अखलाक) से भारी कोई चीज़ नहीं होगी, और अल्लाह ताअला बेहया और बदज़बान से नफरत करता है।
- जमाह तिर्मिज़ी
✅ बख्तावर अदब : दुर्ग
अंजुमन इस्लाहुल मुस्लेमीन कमेटी की जानिब से मोहर्रम उल हराम के मुबारक मौके पर दस रोजा तकरीरी प्रोग्राम मुनाकिद गया। इस दौरान मुक़र्रिर हज़रत अल्लामा मौलाना, खलीफा-ए-सरकार-ए-कला हाशिम कानपुरी ने शोहदा-ए-कर्बला के मौजूद पर कौम से खिताब किया।
अपने बयान में उन्होंने मैदान-ए-कर्बला में हज़रत इमाम हुसैन (अलैहिस्सलाम) और उनके जांनिसार साथियों की कुर्बानियों पर गुफ्तगू करते हुए कहा, इंसानियत, सच्चाई, इंसाफ, सब्र और ज़ुल्म के खिलाफ डटकर खड़े होने का पैगाम ही कर्बला का असली पैगाम है। इस दौरान उन्होंने हिंदूस्तान समेत दुनियाभर के लिए अमन, भाईचारा, खुशहाली और तरक्की के लिए खुसूसी तौर पर दुआ करते हुए अवाम से आपसी मुहब्बत, भाईचारगी और कौमी यकजहती को मजबूत करने की अपील की।
अपना बयान जारी रखते हुए हजरत ने अवाम को कुरआन व सुन्नत की तालीमात पर अमल करते हुए अच्छे अख़लाक, ईमानदारी, इंसानियत, ताअलीम और मुल्क की तरक्की में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाने की नसीहत की। उन्होंने कहा कि एक अच्छा मुसलमान वही है, जो अपने किरदार से समाज में मोहब्बत, अमन, इंसाफ और इंसानियत का पैगाम फैलाए तथा सभी मजाहिब के लोगों के साथ एहतेराम से पेश आए।
ये भी पढ़ें :
https://bakhtawaraadab.blogspot.com/2026/06/muharram-langar.html
https://bakhtawaraadab.blogspot.com/2026/06/bakhtawar-adab-hamza-travel-tales_0506278197.html
कमेटी के सदर सैय्यद आसिफ अली, नायब सदर तबरेज़ खान व कमेटी के तर्जुमान सैय्यद अनीस रज़ा ने बताया कि मुहर्रम उल हराम के मौके पर कमेटी की जानिब से तकरीरी व दीगर फलाही काम अंजाम दिए जाने का यह 65वां साल है।
प्रोग्राम के आखिरी रोज अंजुमन इस्लाहुल मुस्लेमीन कमेटी ने प्रोग्राम को कामयाब बनाने में उलेमा-ए-किराम, मेहमानों, कमेटी के ओहदेदारान, अराकीन, वालंटियर्स, मीडिया व शहरवालों के तंई शुक्रगुजारी का इजहार किया। कमेटी मुस्तकबिल में भी इसी तरह समाज में मोहब्बत, भाईचारा, कौमी यकजहती और इंसानियत का पैगाम फैलाने वाले ऐसे मजहबी व फलाही काम जारी रहने की उम्मीद जताई।
0 टिप्पणियाँ