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शवाल उल मुकर्रम, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
"अल्लाह ताअला फरमाता है: मेरा बंदा फर्ज़ नमाज़ अदा करने के बाद नफिल इबादत करके मुझसे इतना नज़दीक हो जाता कि मैं उससे मोहब्बत करने लग जाता हूँ।"
- सहीह बुख़ारी
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✅ बख्तावर अदब : रियाद
सऊदी अरब हुक्काम ने हज-ओ-उमरा ज़ाइरीन के ग़ार-ए-सौर जाने के लिए मोनो रेल मन्सूबा तैयार किया है। जायरीन को गार-ए-सौर पहुंचने के लिए दो घंटा पैदल चलना पड़ता है। मोनो रेल मंसूबा पूरा होने के बाद जायरीन महज तीन मिनट में गार-ए-सौर पहुंच जाएंगे।सोशल मीडीया पर जारी अपने बयान में सऊदी इंटरटेनमेंट अथार्टी के सरबराह तुर्की ऑल उल शेख़ ने तसदीक़ की है कि ज़ाइरीन की सहूलत और ट्रांसपोर्टेशन के वसाइल को जदीद बनाने के लिए गार-ए-सौर तक जाने के लिए मोनो रेल मंसूबे पर काम किया जा रहा है।
इस हवाले से उन्होंने मज़ीद बताया कि मोनो रेल मंसूबे की तकमील के बाद दो घंटे पैदल चलने की मुसाफ़त महज तीन मिनट में तै की जा सकेगी जिससे ज़ाइरीन को सहूलत होगी। गौरतलब है कि सीरतुन्नबी ﷺ के तारीख़ी मुक़ामात के लिए सउदी हुक्काम की जानिब से (नक़्श-ए-क़दम) इक़दाम पर काम किया जा रहा है जिसका मक़सद ज़ाइरीन को ट्रांसपोर्टेशन की हर मुम्किन और जदीद तरीन सहूलतें फ़राहम करना है। मोनो रेल मन्सूबा इसी इक़दाम का हिस्सा है। उम्मीद की जा रही है कि इस साल नवंबर तक इसका तजुर्बा शुरू किया जा सकता है। दूसरी ओर पगडंडी वाले इलाक़ों के लिए फ़ोरवेल ड्राईव (छोटी बसों) का इंतिज़ाम किया जाएगा जो उन्हें एक मुनफ़रद तजुर्बा फ़राहम करेंगी।
तफसीलात के मुताबिक जायरीन को ट्रांसपोर्टेशन की जदीद सहूलतें फ़राहम करने के लिए शुरू किए जा रहे मंसूबे के तहत मक्का मुकर्रमा से मदीना मुनव्वरा हिज्रत नबवीﷺ के मुक़ामात को नुमायां किया जाएगा, मन्सूबा मुकम्मल होने के बाद दुनिया-भर से आने वाले ज़ाइरीन को हिज्रत नबवी ﷺ के मुक़ामात की कम से कम वक़्त में जियारत करने की सहूलत हासिल होगी, जिसके लिए ज़ाइरीन को जदीद तरीन सफ़री वसाइल फ़राहम किए जा रहे हैं, मंसूबे में मोनो रेल और फ़ोरवेल बसों जैसी सहूलतें शामिल हैं जो ना सिर्फ जदीद ट्रांसपोर्टेशन का एक अहम संग-ए-मील होगा, नबी अकरम ﷺ की सीरत के अहम वाक़ियात को उजागर करने का एक मुनफ़रद जरिया भी साबित होगा।



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