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शवाल उल मुकर्रम, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
"अल्लाह ताअला फरमाता है: मेरा बंदा फर्ज़ नमाज़ अदा करने के बाद नफिल इबादत करके मुझसे इतना नज़दीक हो जाता कि मैं उससे मोहब्बत करने लग जाता हूँ।"
- सहीह बुख़ारी
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मुक़द्दस मुक़ामात को हाश्मी ख़ानदान की निगरानी में
देने की हिमायत
गौरतलब है कि गुजिश्ता चालीस दिनों से मस्जिद अक्सा में नमाज पर पाबंदी आयद थी। पाबंदी हटने के बाद गुजश्ता जुमे को पहली बार ब जमाअत नमाज अदा की गई।
ईरान के साथ जारी जंग को देखते हुए हुक्काम की जानिब से मस्जिद अक्सा में नमाज पर पाबंदी आयद कर दी गई थी। मस्जिद के दुबारा खुलने पर बड़ी तादाद में लोग सुब्ह-सवेरे ही पहुंचना शुरू हो गए और अहाता नमाज़ियों से भर गया था। यरूशलम के महिकमा-ए-इस्लामी औक़ाफ़ के मुताबिक पाबंदी हटने के बाद तक़रीबन एक लाख अफ़राद ने जुमा की नमाज़ में शिरकत की।
हफतों बाद मस्जिद खोले जाने पर पूरे मक़बूज़ा यरूशलम और खासतौर पर क़दीम शहर के एतराफ इसराईली सिक्योरिटी फ़ोर्सिज़ की भारी नफ़री तयनाथ की गई थी। यही नहीं, अहम दाख़िली रास्तों पर रुकावटें नसब की गई थी जिनमें मस्जिद के दाख़िली दरवाज़े भी शामिल थे जहां सिक्योरिटी अहलकार नौजवानों को रोक कर शिनाख्ती दस्तावेज़ात की जांच कर रहे थे। इस दौरान वे कुछ नमाजियों को हिरासत में लेते रहे। कुछ नमाजियों को क़रीबी इलाक़ों में नमाज़ अदा करने से भी मना किया गया, जिनमें लाईन्ज़ गेट के क़रीब अल मुजाहिदीन रोड का इलाक़ा भी शामिल था।
रैली में किया मुतालबा
अर्दन न्यूज के मुताबिक अर्दन में जुमा की नमाज़ के बाद एक रैली निकाली गई जिसमें यरूशलम के मुक़द्दस मुक़ामात को बरसर-ए इक़तिदार हाश्मी ख़ानदान की निगरानी में देने की हिमायत की गई। मुज़ाहिरीन ने शहर के तहफ़्फ़ुज़ की तारीख़ी और मज़हबी एहमीयत पर ज़ोर देते हुए उन इक़दामात की मुख़ालिफ़त की, जिन्हें वो फ़लस्तीनी शिनाख़्त और मस्जिद अकसा की हैसियत के लिए ख़तरा क़रार देते हैं।शुरका ने शाह अबदुल्लाह दोम की हिमायत का भी इआदा किया, जो बारहा ये कह चुके हैं कि यरूशलम के इस्लामी और मसीही मुक़द्दस मुक़ामात की सरपरस्ती ममलकत की अहम तरीन तर्जीह है।

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