काबा शरीफ पर पहली नजर पड़ते ही मांगे दुआएं, सभी के हक में उठाएं हाथ

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शवाल उल मुकर्रम, 1447 हिजरी 

   फरमाने रसूल      

"बेहतर दोस्त अल्लाह के नज़दीक वो है, जो अपने दोस्तों में बेहतर हो और बेहतरीन पड़ोसी वो है जो अपने पड़ोसियों के हक़ में बेहतर हो।ह्व

- तिर्मिज़ी

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bakhtawar adab. hamza travel tales

मस्जिद खैरुल अनाम दारुल उलूम, सुभाष नगर दुर्ग में एक रोजा तर्बियती कैंप


✅ मुहम्मद जाकिर हुसैन : दुर्ग 

हज के मुबारक सफर पर जाने वाले दुर्ग-भिलाई के आजमीने हज के लिए मस्जिद खैरूल अनाम, दारूल उलूम, सुभाष नगर में एक रोजा तर्बियती कैंप मुनाकिद हुआ जहां मास्टर ट्रेनर, हज हाउस, नागपुर के इंजीनियर शाहिद ने हज के फ़र्ज़, वाजिबात, सुन्नत और नवाफिल की अदायगी के बारे में तफसील से जानकारी दी। 

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    आजमीने हज से खिताब करते हुए उन्होंने सफर-ए-हज के दौरान तमाम मुकामात पर दुआओं का खास एहतेमाम करने पर जोर देते हुए मुजदलफा और मीना में कयाम, सफा और मरवा की सई, तवाफे काअबा और एहराम बांधने का सही तरीका बताया। साथ ही सफर में साथ ले जाने वाली जरूरी अश्या की भी उन्होंने जानकारी दी ताकि सफर के दौरान कोई दुश्वारी पेश न आए। 
    उन्होंने मदीना मुनव्वरा में हुजूर  ﷺ  के रौजे पर हाजिरी और जियारत, शहरे मदीना के आदाब, दरूद और सलाम पेश की अहमियत और मस्जिदे नबवी  में अदा की जाने वाली 40 नमाजों की अहमियत बताई। उन्होंने अहादीस के हवाले से बताया कि मक्का मुकर्रमा में एक नमाज़ का सवाब एक लाख नमाज़ और मस्जिदे नबवी  में एक नमाज़ का सवाब 50 हजार नमाज़ पढ़ने के बराबर है। 
    इस दौरान उन्होंने आजमीने हज से कहा कि सफरे हज के दौरान आजमीने हज पूरी उम्मत की नुमाइंदगी करते हैं, लेहाजा उन्हें चाहिए कि वे खूब इस्तगफार करें, सभी के हक में अमन ओ खुशहाली की दुआएं करें।
    आप सभी की तरफ से नुमाइंदे बनकर जा रहे इसलिए इंसानी पहलू से सभी के लिए खूब अस्तगफार (माफी), उनके हक़ मे दुआएं और खुशहाली व अमन की दुआएं जरूर करें। काअबा शरीफ पर पहली नजर पड़ने की अहमियत पर रोशनी डालते हुए मास्टर ट्रेनर हाजी शाहिद ने कहा, यही सफर का हासिल है। काअबा शरीफ पर नजर पड़ते ही खूब दुआएं करें। रो-रोकर दुआएं करें। गुनाहों से इस्तगफार, हज की कबूलियत और उम्मते मुसलमां की खैरख्वाही की खूब-खूब दुआएं करें। 
    उन्होंने कहा, तवाफ के दौरान कोई सामान गिर जाने पर उसे उठाने के लिए न रुकें बल्कि तवाफ जारी रखें। एहराम बांधने के बाद खुशबू न लगाएं। औरतें कांच की चूड़ियां न पहनें, मुमकिन है भीड़ मे टूट जाए और नुकसान का सबब बने। आखिर में सैय्यद जमीर ने दुर्ग-भिलाई के साथ सूबा छत्तीसगढ़ की खुशहाली, तरक्की, अमन व चैन के के साथ साथ सफर को आसान बनाने और कुबूलियत की दुआ की। तर्बियती कैंप की कामयाबी में सदर मीर हमीद, सेक्रेटरी मोहम्मद साजिद खान, शकील चौधरी, मोहम्मद सरफराज, सलीम, सैय्यद असलम, मुशीर, साजिद, सैय्यद रिजवान अहमद, हारुन अंसारी, नैय्यर इकबाल, हम्जा, ओवैस, साजिद अनवर और मोहम्मद नासिर वगैरह ने कलीदी किरदार अदा किया। इस दौरान कसीर तादाद में आजमीने हज व खिदमत गुजार मौजूद थे। 

दोस्तों की मदद से उठी बेटी की डोली

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भिलाई। खुर्सीपार इलाके की एक बेटी को उसकी अजदवाजी जिंदगी शुरू करने के लिए इलाके के ही दो नवजवानों ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया। मामला केनाल रोड, जोन-2, खुर्सीपार का है, जहां एक रिक्शा चालक की बेटी की शादी के लिए वहीं रहने वाले जेडी खान और दीपक कुमार ने शादी के लिए जरूरी सामान मुहैया कराया। दोनों दोस्त की इस पहल से बिटिया की शादी में आ रही माली दिक्कत दूर हुई। और इस तरह 12 अप्रैल को उसकी अजदवाजी जिंदगी का सफर शुरू हुआ।



 


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