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जीअकादा, 1447 हिजरी
﷽
फरमाने रसूल ﷺ
जो खाने के बाद बर्तन को चाट लेगा, वह बर्तन उसके लिए अस्तगफर करेगा, वो बर्तन कहता है, अल्लाह ताअला तुझको जहन्नम से आज़ाद करे, जिस तरह से तूने मुझे शैतान से निजात दी।
- इमाम अहमद
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हज़रत सैयद चांद शाह वली (रहमतुल्लाह अलैह) तीन मजार का सालाना उर्स मनाया जा रहा है। उर्स पाक की शुरूआत शाही संदल व चादर निकालने से हुई जो शहर का गश्त करता हुआ आस्ताने पहुंचा जहा चादर पोशी की रस्म अदा कर दुआ-ए-खैर की गई।
वहां आते हैं फरिश्ते
असलम रायपुरी ने कव्वाली से बांधा समा
शहर के उभरते कव्वाल असलम रायपुरी ने जब पुकारो मेरे मौला को पुकारोङ्घ, तेरे इश्क में भूल चुका हूं खुद कोङ्घ, नजर में कोई और सूरत बसती नहीं चांद शाह बाबाङ्घ., मै बलहारी जाऊ चांद शाह बाबाङ्घजैसे कलाम पेश किए। अगले रोज कुल शरीफ की फातिहा हुई जिसमें इमाम ओ खतीब ने आस्ताने में मौजूद जायरीन के साथ, मुल्क, रियासत और कौम की खुशहाली और तरक्की की दुआ की। इस दौरान कसीर तादाद में सभी मजाहिब के लोग मौजूद थे। गौरतलब है कि हजरत चांद शाह वली रहमतुल्लाह का उर्स कौमी एकता की मिसाल है। उर्स का इख्तेताम इतवार को होगा।


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