तबलीग़ जमात के 'अमीर' को आखिरी विदाई देने शामिल हुए सूबे के हजारों अकीतदमंद

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 जीअकादा, 1447 हिजरी 

   फरमाने रसूल   

मोमिन को पहूंचने वाली हर तकलीफ, बीमारी, गम, थकावट और फ़िक्रमन्दी के बदले उसके गुनाह मिटा दिए जाते है।

- सहीह मुस्लिम 

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✅ बख्तावर अदब : भिलाई

    छत्तीसगढ़ और नागपुर विदर्भ इलाके में तबलीग़ जमात के 'अमीर' हाजी मोहम्मद असलम का सनीचर 2 मई को तड़के दो बजे इंतकाल हो गया। हाजी असलम कई दिनों से बीमार चल रहे थे। सैय्यद असलम (खुर्सीपार) ने बताया, मरहूम हाजी मोहम्मद असलम के जनाजे की नमाज़ यंग मुस्लिम फुटबॉल ग्राउंड मोमिनपुरा, नागपुर में उनके बेटे मौलाना अब्दुल्ला ने अदा कराई।

    नमाजे जनाजा मे निजामुद्दीन मरकज दिल्ली, बरार, महाराष्ट्र, विदर्भ और छत्तीसगढ़ के उलेमा के साथ आम लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। छत्तीसगढ़ के मुख्तलिफ अजला से मआशरे के लोगों ने हजारों की तादाद में नागपुर पहुंच कर अपनी अकीदत का इजहार किया। 

    गौरतलब है कि तबलीग़ जमात में 'अमीर' का ओहदा मशविरे से तय होता है। हाजी मोहम्मद असलम नागपुर के रहने वाले थे और तबलीगी काम को लेकर छत्तीसगढ़ बरार, महाराष्ट्र समेत देश-विदेश में सक्रिय थे। उन्होंने बताया कि हाजी मोहम्मद असलम ने अल्लाह के दीन और हज़रत मोहम्मद 000 की पाकीजा जिंदगी अपनाने लोगों की रहनुमाई की। मआशरे के लिए उनका दुनिया से जाना एक रहनुमा एक सच्चा दाई और बुर्जुग शख्सियत का चला जाना है।


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