इस्लाम की ताअलीमात का असर, गैर मुस्लिम की जान बचाने रोज़ा तोड़कर किया ब्लड डोनेट

 रमजान उल मुबारक, 1447 हिजरी 

फरमाने रसूल ﷺ
जिस शख्स का मकसद आखेरात की बेहतरी हो, अल्लाह ताअला उसके दिल को गनी कर देता है, उसके बिखरे हुए कामों को समेट देता है और दुनिया ज़लील हो कर उसके पास आती हैं।
- तिर्मीज़ी शरीफ



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✅ बख्तावर अदब : भिलाई

    माहे रमज़ान के सब्र, इबादत और इंसानियत के पैगाम पर अमल करते हुए किसी की जान बचाने के लिए खुर्सीपार के आरिफ अयूब ने रोज़ा तोड़कर ब्लड डोनेट किया। 
    जानकारी के मुताबिक आरिफ अयूब के पूरे रोज़े चल रहे थे। बाईसवें रोज़े में उन्हें पता चला कि सीमा सोनवानी नाम की खातून को बी नेगेटिव ब्लड की जरूरत है। ब्लड का ये ग्रुप रेयर ग्रुप में शामिल है जो कम ही लोगों में होता है। आरिफ को जब पता चला तो उन्होंने अपना रोजा तर्क कर सीमा सोनवानी के लिए ब्लड डोनेट किया। 
    खुर्सीपार के रहने वाली आरिफ अय्यूब ने बताया कि इसके लिए उनके दोस्तों से उन्हें हौसला अफजाई मिली। उन्होंने बताया कि रेलवे में मुलाजिम उनके दोस्त जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। रेलवे मुलाजिम जेडी खान और दीपक कुमार गुजिश्ता पंद्राह बरसों से ड्यूटी के बाद जरूरतमंद के लिए ब्लड डोनेट करते आ रहे हैं। यही नहीं, जरूरतमंद लोगों को वे अस्पताल तक पहुंचाने में मदद करते हैं। 

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