बच्चों को इनाम देकर मनाई गई बाबा सरकार की यौमे पैदाईश

रमजान उल मुबारक, 1447 हिजरी 

फरमाने रसूल ﷺ

आलाह ताअला फरमाता है,:ऐ इंसान! मेरी इबादत के लिये फारिग हो जा, मैं तेरे दिल को मालदारी (कनाअत) से भर दूंगा, तेरी मोहताजी खत्म कर दूंगा, और अगर तू ऐसा नहीं करेगा तो मैं ऐसे कामों में मसरूफ कर दूंगा जो तेरे मुकद्दर में नहीं और तेरी मोहताजी खत्म नही करुँगा।*

सुनन इब्न माजह 


अकीदतमंदों ने काटा केक, मांगी खैर की दुआएं

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✅ बख्तावर अदब : भिलाई 

    सूफी हजरत दाता बाबा भोला शफी शाह, रहमतुल्लाह अलैह की यौमे पैदाईश पर 13 मार्च को हिंदुस्तान की तमाम खानकाहों में उर्स मनाया गया। इस जुमरे में नंदिनी एयरोड्रम के समीप वाके हजरत की खानकाह में अकीदतमंदों ने चादरपोशी कर खैर और खुशहाली की दुआएं की। 
    गौरतलब है कि हजरत दाता बाबा भोला शफ़ी शाह, रहमतुल्लाह अलैह चिश्तिया, साबिरिया, अमजदिया, मुरादिया सिलसिले के अजीम बुजुर्ग है। हजरत की मज़ारे अकदस उत्तर प्रदेश में देवरिया जिले के सलेमपुर तहसील के मझौली राज मे छोटी गंडक नदी के किनारे मे मौजूद है। हजरत के चाहने वाले मुरीद दुनिया भर में फैले हुए हैं। 

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याद की गई मौला अली की शहादतइफ्तार के बाद की गई दुआएं

    मौला-ए-कायनात, कायनात शेर-ए-खुदा, हजरत अली, मुश्किलकुशा की शहादत की याद में 21 रमजान, 11 मार्च की शाम ख़ानकाह भोलाईया, ग्राम बिरेभाठ, नंदिनी में रोजेदारों ने इफ्तार किया जिसके बाद मुर्शिदे आज़म पढ़ा गया।

    हाजी एमएच सिददीकी ने शिजरा शरीफ़ पढ़ा। दुआएं खैर की गई और मौला-ए-मुश्किलकुशा की शहादत पर खिराजे अक़ीदत पेश की गई। इस मौके पर ख़ादिम हसन अंसारी ने नजर पेश की। प्रोग्राम में कसीर तादाद में लोगों ने शिरकत की।

    इसी तरह शेरे खुदा मस्जिद, हाऊसिंग बोर्ड, कैलाश नगर में अली मौला की याद मनाई गई। मौलाना जलालुद्दीन मिस्बाही ने कौम से खिताब किया। उन्होंने कहा, आपके दर से ही विलायत बटती है। इस दौरान दुआऐ खैर व नजर पेश किए गए। ईमाम व खतीब मौलाना हाफ़िज़ ताजीम रज़ा भागलपुरी ने  मौला  मुश्किल कुशा शेरे ख़ुदा की शान में सलात व सलाम का नज़राना पेश किया। हाफ़िज आसिफ रजा और तमाम नमाजियो ने भी खिराजे अक़ीदत पेश की। मस्जिद सदर हाजी ताहिर सिद्दीकी व तमाम कमेटी के हजरात की मौजूदगी में तबर्रुक तकसीम किया गया।

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    भिलाई खानकाह में हजरत की यौमे पैदाईश पर 13 मार्च को रोजेदारों ने अफ्तारी की जिसके बाद बाबा सरकार की गद्दी पर चादर पोशी कर फूलों की चादर पेश की गई। अकीदतमंदों ने मुर्शीद ए आज़म पढ़ा और शिजरा ख्वानी के बाद सलात व सलाम का नजराना पेश किया। इस मौके पर मौजूद सभी मजाहिब के लोगों ने बाबा सरकार के नाम से सैकड़ों की तादाद में केक काटे। जिसे तबर्रूक के तौर पर तकसीम किया गया। इस दौरान खानकाह आए तमाम बच्चों को तोहफे दिए गए। आखिर में सभी ने लंगर में भागीदारी दी। 

    तकरीब को कामयाब बनाने में खादिम हसन अंसारी के साथ साबिर, आफताब हुसैन, प्रमोद कुट्टी, नासिर, परमानंद यादव, असलम, अफरोज, मोहम्मद फिरोज, शरफुद्दीन, सलाम, मोहम्मद शोएब, सागर, मुन्ना, अबरार रजा, समेत कसीर तादाद में लोंगों ने हिस्सेदारी निभाई। आखिर में हाजी एमएच सिद्दीकी ने मेहमानों के तंई शुक्रगुजारी का इजहार किया। 





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